शेयर मंथन में खोजें

जीरे में नरमी का रुझान, धनिया में तेजी की संभावना - एसएमसी

हल्दी वायदा (दिसंबर) की कीमतों के 6,350-6,500 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।

खरीदार इरोद के बाजार में अच्छी क्वालिटी की हल्दी की खरीदारी करना चाहते हैं। मंगलवार को कुल 5,500 बैग हल्दी की आवक हुई है, लेकिन केवल 70% हल्दी की ही बिक्री हुई। अच्छी क्वालिटी के फिंगर वेरायटी की कीमतें 8,000-8,200 रुपये प्रति क्विंटल और रूट वेरायटी की कीमतें 7,100 रुपये प्रति क्विंटल रही है।
जीरा वायदा (दिसंबर) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ 1,9250-1,9500 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। कमजोर माँग के कारण गुजरात और राजस्थान के बाजारों में कीमतों में गिरावट हुई है। गुजरात के बाजारों में जीरे की कीमतों में 25-30 रुपये प्रति 20 किलो ग्राम की गिरावट हुई है, जबकि राजस्थान के बाजारों में 100-150 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम की गिरावट हुई है। अधिक कीमतों पर थोक व्यापारी जीरे की खरीदारी नही कर रहे हैं।
धनिया वायदा (दिसंबर) की कीमतों में 6,040 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ बढ़त जारी रह सकती हैं। गुजरात के बाजारों में धनिया की कीमतों में 15-20 रुपये प्रति 20 किलो ग्राम की गिरावट हुई है, जबकि राजस्थान के बाजारों में 100 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम की गिरावट हुई है। मौसम के अनुकूल नही होने के कारण गुजरात में बुआई काफी पिछड़ गयी है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार अभी तक धनिया की बुआई लगभग 85 से 90% तक कम हुई है। विधानसभा चुनाव के कारण मध्य प्रदेश के बाजार 29 नवंबर तक बंद रहेंगे। (शेयर मंथन, 28 नवंबर 2018)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख