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सोयाबीन में आ सकती है मंदी, सरसों के लिए बाधा - एसएमसी

सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों में तेजी के रुझान के कमजोर पड़ने की संभावना है।

मुनाफा वसूली के कारण सोयाबीन के लिए 3,900-3,915 रुपये के स्तर पर बाधा रह सकती है। ऐसी खबरें है कि नाफेड ने मूल्य समर्थन योजना के तहत 28 जनवरी से राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में खरीफ सोयाबीन की बिक्री शुरू कर दिया है। लेकिन हाजिर बाजारों में कम आवक और मिलों की ओर से अधिक खरीदारी के कारण सोया तेल और सोयाबीन की कीमतों को मदद मिल रही है। सोया तेल की कीमतें बढ़ कर 780-782 रुपये प्रति 10 किलो ग्राम हो गयी हैं, जबकि सोयाबीन की कीमतें 3,850-3,900 रुपये प्रति 100 किलो ग्राम हो गयी हैं।
सरसों वायदा (फरवरी) की कीमतों को 4,020 रुपये के स्तर पर बाधा रह सकती है। आगामी दो हफ्ते में सरसों के नये स्टॉक की आवक होने की संभावना से कीमतों की बढ़त पर रोक लगी रह सकती है। खरीदार पुराना स्टॉक खरीदना नही चाहते हैं और इस तरह की कोई भी आवक होने की स्थिति में बाजारों में नरमी का रुझान बढ़ सकता है। इस बीच नाफेड के पास लगभग 2.54 लाख टन सरसों का स्टॉक है और आगामी दिनों में इसे बाजार में बेचना जारी रखेगा।
सीपीओ वायदा (फरवरी) की कीमतों में 580-582 रुपये तक बढ़त दर्ज करने की संभावना है। कल मलेशियन पॉम ऑयल की कीमतें सात महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गयीं और बेंचमार्क अप्रैल डिलीवरी की कीमतें 1.7% की बढ़त के साथ 40,338.15 रुपये के स्तर पर बंद हुई। (शेयर मंथन, 29 जनवरी 2019)

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