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जीरा में बढ़त, हल्दी में गिरावट के संकेत - एसएमसी

हाजिर बाजारों से नकारात्मक संकेत के कारण हल्दी वायदा (नवम्बर) की कीमतों में 5,700 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।

इरोड के चार हल्दी बाजारों में हल्दी की आवक कम होने के बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। मध्यम-गुणवत्ता वाली हल्दी का लगभग 1,700-1,800 बैग बिक्री के लिए आ रहा हैं, जिनमें से खरीदार लगभग 1,100-1,200 बैग हल्दी खरीद रहे हैं। केवल स्थानीय और थोड़े से घरेलू माँग के कारण वे अपनी खरीद को लेकर बहुत सतर्क हैं। मध्यम किस्म की फिंगर की अच्छी गुणवत्ता वाली हल्दी के लिए कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई है। माँग में कमी के कारण स्टॉकिस्टों द्वारा सीमित मात्रा में खरीदारी की जा रही हैं। हल्दी उत्पादक भी बेहतर कीमतों को प्राप्त करने के लिए सीमित मात्रा में भी हल्दी ला रहे हैं। इरोड कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी में, फिंगर वेराइटी की हल्दी 4,674-5,669 रुपये प्रति क्विंटल में और रूट वेराइटी की हल्दी 4,799- 5,589 रुपये प्रति क्विंटल में बेची गयी है।
जीरा वायदा (नवम्बर) की कीमतों के 13,700-13,800 रुपये के दायरे में मजबूत होने की संभावना है और कीमतों की बढ़त पर रोक लगी रह सकती है। कम घरेलू खरीद और निर्यात माँग में कमी के कारण हाजिर बाजारों में नरमी है। जीरा के 14,000 बैग की लगातार आवक के कारण सभी वेराइटी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। धनिया वायदा (नवम्बर) की कीमतों को 6,750 रुपये के पास सहारा मिल रहा है और कीमतें 6,900 के स्तर तक बढ़ सकती है। हाजिर बाजारों में त्यौहारी माँग के कारण धनिया की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हुई है क्योंकि मसाला निर्माता ताबड़तोड़ खरीदादारी में लगे हुये हैं और प्रीमियम गुणवत्ता की आपूर्ति में कमी आयी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिये कि मध्य प्रदेश में लगभग 2 सप्ताह की हड़ताल के बाद मंडियों के फिर से शुरू होने के साथ माँग वापस आ गयी है। इस बीच राजस्थान में व्यापारियों ने मंडी शुल्क में कमी की माँग को लेकर विरोध् प्रदर्शन शुरू कर दिया है। (शेयर मंथन, 12 अक्टूबर 2020)

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