जीरे में सुस्ती, हल्दी को 7,850-8,150 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना - एसएमसी

बिकवाली के कारण हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में कल 1.8% की गिरावट दर्ज की गयी है। अब कीमतों के 7,850-8,150 रुपये के दायरे में सीमित करने की संभावना हैं।

आंध्र प्रदेश में प्रमुख हाजिर बाजार निजामाबाद में, कीमतें कल 2% कम होकर 7,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गयी। वर्तमान में कीमतें पिछले साल की तुलना में अधिक हैं, क्योंकि हल्दी की माँग दुनिया भर में इसके औषधीय और अन्य प्रतिरक्षा संबंधी लाभो के कारण बढ़ी है। हल्दी की बुवाई वाले क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हुई है और अगले सीजन में अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। 2021 के पहले 6 महीनों में, हल्दी का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3% कम होकर 77,300 टन हो गया, लेकिन आने वाले महीनों में यह अधिक हो सकता है।
मुनाफा वसूली के कारण जीरा वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में कल गिरावट हुई है और आगे भी नरमी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतें 14,880 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 14,500 रुपये तक लुढ़क सकती है। व्यापारियों और किसानों के पास पर्याप्त स्टॉक के कारण उच्च स्तर पर कीमतों पर दबाव रह सकता है। सितंबर से नवंबर के दौरान पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य बारिश के पूर्वानुमान से गुजरात और राजस्थान में जीरा की बुवाई में बढ़ोतरी हो सकती है। 2021 (जनवरी-जून) में, देश ने पिछले साल की समान अवधि के 1.3 लाख टन की तुलना में 1.50 लाख टन से अधिक जीरा निर्यात किया है।
मुनाफा वसूली के कारण धनिया वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में कल गिरावट हुई है। अब कीमतें 8,000 रुपये के रुकावट के साथ 7,650 रुपये तक गिरावट दर्ज कर सकती है। पिछले सप्ताह राजस्थान में हाजिर कीमतों में थोड़ा बदलाव हुआ है क्योंकि मौजूदा कीमतों पर माँग सामान्य बनी हुई है। थोक खरीदार और मसाला मिल मालिक बड़ी खरीदारी से परहेज कर रहे हैं। अगस्त में, शुष्क मौसम के कारण कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन मानसून की बारिश फिर से शुरू होने से कीमतों पर दबाव पड़ा है। अप्रैल-जून अवधि के दौरान धनिया का निर्यात 11% कम होकर पिछले वर्ष के 15,650 टन के मुकाबले 13,800 टन हुआ है लेकिन समान अवधि में 5 साल के औसत की तुलना में 14.7% अधिक है। (शेयर मंथन, 14 सितम्बर 2021)

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