शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा में तेजी की संभावना - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में उछाल दर्ज किये जाने की संभावना है। सोने की कीमतों में 49,980 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 50,800 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 60,800 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 62,100 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में चुनाव से पहले एक बड़े राजकोषीय स्टीमुलस की उम्मीद से आज सोने की कीमतों में 1,900 डॉलर के नजदीक स्थिरता है। सोने की हाजिर कीमतें 1,900.21 डॉलर प्रति औसतन के पास कारोबार कर रही हैं जबकि अमेरिकी सोना वायदा 0.2% की नरमी के साथ 1,902.90 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने रविवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापक कोरोना वायरस राहत पैकेज पर मतभेद बने हुये है लेकिन उम्मीद है कि विधेयक को 3 नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव से पहले पारित किया जा सकता है।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ आज ब्रेक्सिट के बाद होने वाली व्यापार वार्ता में जान फूंकने का प्रयास करेंगे, जो पिछले सप्ताह लगभग समाप्त हो गयी थी, क्योंकि हर पक्ष ने इसे मौलिक रूप से बदलने की जरूरत बतायी थी। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर हारुहिको कुरोदा ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति लक्ष्य या आगे के मार्गदर्शन को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है, भले ही संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप विकास को बढ़ावा देने के बेहतर तरीकों की तलाश करने के लिए अपनी नीतिगत रूपरेखा की समीक्षा कर रहे हैं। दुनिया में सोने के सबसे बड़े एक्सचेंज एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग शुक्रवार को 0.27% गिरकर 1,272.56 टन हो गयी है। चांदी की कीमतें 0.1% बढ़कर 24.20 डॉलर प्रति औसतन पर आ गयी। (शेयर मंथन, 19 अक्टूबर 2020)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख