शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा की कीमतों में तेजी के रुझान- एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों में 48,900 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 49,400 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 63,500 रुपये स्तर पर सहारा के साथ 64,380 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।

इस सप्ताह अमेरिकी राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज की उम्मीद और कोविड-19 वैक्सीन लगाये जाने की संभावना के बीत शुरुआती एशियाई व्यापार में सोने की कीमतों थोड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। सोने की हाजिर कीमतों 1,836.91 डॉलर प्रति औसतन के पास कारोबार कर रही हैं जबकि अमेरिकी सोना वायदा 18,840.70 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। ब्रिटेन इस हफ्ते फाइजर की की कोविड-19 वैक्सीन शुरू करने वाला पहला देश बनने की तैयारी कर रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस में कल एक द्विदलीया 908 बिलियन डॉलर के कोरोना वायरस सहायाता योजना को गति मिली क्योंकि सीनेट और प्रतिनिधी सभा के नेताओं के हंगाम के बीच रूढ़िवादी सांसदों ने अपना समर्थन व्यक्त करते हुये शुक्रवार को दिखाया गया कि अमेरिकी द्वारा नवंबर में छह महीने में सबसे कम रोजगार ने महामारी के कारण आर्थिक मंदी की सीमा को उजागर किया। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ इस सप्ताह के अंत में बेक्सिट के लिए व्यापार समझौता करने का अंतिम प्रयास करेंगे। दुनिया में सोने के सबसे बड़ेएक्सचेंज-ट्रेडेड फंड एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग शुक्रवार को 0.6% गिरकर 1,182.70 टन हो गयी। चांदी की कीमतें 0.1% गिरकर 24.13 डॉलर प्रति औसतन पर आ गयी है। (शेयर मंथन, 07 दिसंबर 2020)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख