शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 48,900 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 48,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 66,880 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 67,200 रुपये पर सहारा रह सकता है।
आज सोने की कीमतों में स्थिरता रही है क्योंकि निवेशक अमेरिकी प्रोत्साहन पैकेज को लेकर घटनाक्रमों का इंतजार कर रहे है लेकिन मजबूत डॉलर के कारण कीमतें साप्ताहिक और मासिक गिरावट की ओर अग्रसर है। सोने की हाजिर कीमतें 1,840.91 डॉलर प्रति औसतन के नजदीक कारोबार कर रही हैं। अमेरिकी सोना वायदा 0.1% बढ़कर 1,839.70 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। प्रमुख करेंसियों के मुकाबले डॉलर 0.2% मजबूत हुआ है जिससे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना महँगा हो गया। इस महीने डॉलर 0.8% बढ़ गया है। पिछले सप्ताह में अमेरिकी बेरोजगार दावे में गिरावट हुई है जबकि चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद के आँकड़े अनुमान के अनुकूल रहे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आग्रह किया कि राजकोषीय समर्थन तब तक बना रहना चाहिये जब तक कि आर्थिक सुधार मजबूती से नहीं दर्ज की जा रही है।
राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा प्रस्तावित 1.9 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी कोरोना वायरस वायरस का सौदा अभी तक पारित नहीं हुआ है। विश्व स्वर्ण परिषद ने गुरुवार को कहा कि 2020 में सोने की वैश्विक माँग 11 साल में सबसे कम हो गयी, जबकि भारत में खपत 26 साल में सबसे कम हो गयी। दुनिया में सोने के सबसे बड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग गुरुवार को 0.4% कम हो गयी है। चांदी की कीमतें 0.7% घटकर 26.18 डॉलर प्रति औसतन पर पहुँच गयी है। (शेयर मंथन, 29 जनवरी 2021)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख