शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 47,900 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 47,100 रुपये पर सहारा रह सकता है।

कीमतें यदि 47,300 रुपये के स्तर से ऊपर बनी रहती है तो तेजी बरकरार रह सकती है। चांदी की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है और कीमतों को 63,700 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 62,900 रुपये पर सहारा रह सकता है। पिछले सत्र में भारी बिकवाली के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी के कारण आज सोने की कीमतों में बढ़त देखी जा रही है। बेंचमार्क अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रजरी की यील्ड आज 1.5904% के उच्च स्तर तक बढ़ने के बाद कम हो गयी, जिससे गैर-यील्ड वाले सोने की अवसर लागत कम हो गयी। सितंबर में अमेरिकी खुदरा बिक्री अप्रत्याशित रूप से बढ़ने के आँकड़ों के बाद शुक्रवार को ट्रेजरी की यील्ड में तेजी से वृद्धि हुई, जिसने फेडरल रिजर्व से जल्द से जल्द ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गयी है। डॉलर सूचकांक पिछले सप्ताह में 2021 के उच्च स्तर से 0.6% फसल गया, क्योंकि निवेशकों का अनुमान है कि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी फेड की दर वृद्धि को आगे बढ़ा सकती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंडंयू बेली ने रविवार को संकेत दिया है कि ब्रिटिश केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने के लिए कमर कस रहा है क्योंकि मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ रहा है।
दुनिया में सोने के सबसे बड़े एक्सचेंज-ट्रडेड फंड एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग शुक्रवार को 0.3% गिरकर 980.1 टन हो गयी, जो गुरुवार को 982.72 टन थी। (शेयर मंथन, 18 अक्टूबर 2021)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख