शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है। सोने की कीमतों को 47,700 रुपये पर सहारा और 48,400 रुपये पर रुकावट रह सकता है।

चांदी की कीमतों में भी नरमी रहने की संभावना है और कीमतों को 61,900 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 60,600 रुपये पर सहारा रह सकता है। तेजी से फैल रहे ओमाइक्रोन कोरोना वायरस संस्करण को लेकर चिंताओं के मुकाबले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जोखिम लेने की क्षमता में बढ़ोतरी होने से सोने की कीमतें काफी कम दायरे में कारोबार कर रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड मंगलवार को अधिक हो गयी क्योंकि व्यापारियों ने आशावादी आर्थिक स्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया और 20 वर्ष की बॉन्ड नीलामी में मुद्रास्फीति को लेकर आशंका कम हो गयी। अधिक यील्ड से बुलियन धारण करने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता। यूरोप के देशों ने मंगलवार को आवाजाही पर नये प्रतिबंधें को लेकर विचार किया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सभी अमेरिकियों से अपील की कि वे दूसरे क्रिसमस से पहले दुनिया भर में फैले ओमिक्रॉन संस्करण से लड़ने के लिए टीकाकरण करवायें।
ब्रिटिश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सोमवार को कहा कि वह जरूरत पड़ने पर ओमिक्रॉन संस्करण के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबंध लगायेंगे। नीदरलैंड द्वारा चौथा लॉकडाउन शुरू करने के बाद अन्य यूरोपीय राष्ट्र क्रिसमस प्रतिबंधें पर विचार कर रहे हैं। डॉलर के सूचकांक में गिरावट हुई क्योंकि निवेशकों ने जोखिम भरी मुद्राओं और परिसंपत्ति वर्गों का समर्थन किया। (शेयर मंथन, 22 दिसंबर 2021)

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख