शेयर मंथन में खोजें

सर्राफा

सुरक्षित डॉलर में निवेश किये जाने के कारण सर्राफा में गिरावट के संकेत - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 45,300 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,600 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में 67,780 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 66,900 रुपये पर सहारा रह सकता है।

डॉलर के कमजोरी से सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 45,400 रुपये के स्तर पर रुकावट के साथ 44,780 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 67,690 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 66,900 रुपये पर सहारा रह सकता है।

फेडरल रिजर्व के फैसले से मिलेगी सर्राफा बाजार को दिशा - एसएमसी

सर्राफा की कीमतों में नरमी का रुझान रहने की संभावना है। सोने की कीमतों को 45,300 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 67,800 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 66,900 रुपये पर सहारा रह सकता है।

सर्राफा बाजार में गिरावट की संभावना - एसएमसी साप्ताहिक रिपोर्ट

अमेरिकी बांड यील्ड और डॉलर में गिरावट के कारण सर्राफा की कीमतों में गिरावट हुई और निश्चित रूप से पिछले सात हफ्तें में सबसे अधिक साप्ताहिक बढ़त दर्ज की हैं।

सर्राफा की कीमतों में तेजी का रुझान - एसएमसी

सोने की कीमतों को 45,000 रुपये के स्तर पर बाधा के साथ 44,500 रुपये पर सहारा रह सकता है जबकि चांदी (मई) की कीमतों में काफी अधिक उठापटक हो सकती है और कीमतों में 6,7400 रुपये के स्तर पर अड़चन के साथ 66,400 रुपये पर सहारा रह सकता है।

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख