शेयर मंथन में खोजें

निफ्टी (Nifty) चढ़ कर 6078 पर, सेंसेक्स (Sensex) 143 अंक ऊपर

मजबूत अंतरराष्ट्रीय संकेतों की वजह से भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक आज मजबूती के साथ बंद हुए। 

कारोबार के अंत में सेंसेक्स (Sensex) 143 अंक यानी 0.71% की मजबूती के साथ 20,302 पर बंद हुआ। निफ्टी 46 अंक यानी 0.76% की बढ़त के साथ 6078 पर रहा। सीएनएक्स मिडकैप सूचकांक में 0.24% की बढ़त रही। बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 0.06% की मामूली बढ़त और बीएसई स्मॉलकैप में 0.10% की कमजोरी रही। आज के कारोबार में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खरीदारी का रुख रहा।

सकारात्मक एशियाई संकेतों के बीच घरेलू बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। कारोबार के शुरुआती मिनटों में ही बाजार में जोश बढ़ा। इसके बाद बाजार में एक सीमित दायरे में कारोबार होता रहा। मजबूत यूरोपीय संकेतों के बीच घरेलू बाजार में मजबूती बढ़ी। इस दौरान सेंसेक्स 20,351 और निफ्टी 6093 दिन के ऊपरी स्तरों तक चढ़ गये। दोपहर के कारोबार में बाजार की मजबूती में कमी आयी और बाजार अपने ऊपरी स्तरों से नीचे फिसला। हालाँकि, दोपहर बाद के कारोबार में बाजार में मजबूती बढ़ी। आखिरकार सेंसेक्स-निफ्टी आज के कारोबार में मजबूती के साथ बंद हुए।
क्षेत्रो के लिहाज से आज कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र को सबसे ज्यादा 3.85% का फायदा पहुँचा। एफएमसीजी में 1.53%, रियल्टी में 1.42% और बैंकिंग में 1.29% की मजबूती रही। पीएसयू में 0.89%, धातु में 0.79%, तेल-गैस में 0.55%, पावर में 0.53%, आईटी में 0.45%, ऑटो में 0.34%, कैपिटल गुड्स में 0.32% और हेल्थकेयर में 0.18% की बढ़त रही। टीईसीके में 0.04% की मामूली बढ़त रही। (शेयर मंथन, 23 जुलाई 2013) 
 

 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख