कॉटन वायदा (मार्च) की कीमतों के नरमी के रुझान के साथ सीमित कारोबार करने की संभावना है और कीमतें 22,100-22,050 रुपये के स्तर पर पहुँच सकती है।
कॉटन वायदा (नवंबर) की कीमतों में एक हफ्ते के निचले स्तर पर गिरावट हुई लेकिन बाद में कीमतें सपाट बंद हुई।
एमसीएक्स में कॉटन वायदा (जनवरी) में 20,800 रुपये के नजदीक निचले स्तर पर खरीदारी की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से नकारात्मक संकेत लेते हुये कॉटन वायदा (अप्रैल) की कीमतें 21,700-21,500 रुपये तक लुढ़क सकती है।
आईसीई में कॉटन वायदा की कीमतों में मजबूती के रुख घरेलू बाजार में कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतें लगातार चौथे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुई।
कॉटन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में पिछले सप्ताह 7% की उछाल दर्ज गयी है और कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर 30,940 रुपये पर पहुँच गयी।
कॉटन वायदा (नवंबर) की कीमतें कल बढ़त के साथ बंद हुई। अब कीमतें 32,000 रुपये के स्तर तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकती है।
कॉटन वायदा (नवंबर) की कीमतें कल बढ़त के साथ बंद हुई। अब कीमतें 31,050 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 32,000 रुपये के स्तर तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकती है।
विदेशी बाजारों में तेजी के रुझान के कारण कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें 1% की बढ़त के साथ बंद हुई।
कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतें 31,850 रुपये पर सहारा के साथ 32,500 रुपये तक बढ़त दर्ज कर सकती है।
मिलों की ओर से बेहतर माँग के कारण कल कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतों में 0.7% की बढ़ोतरी हुई है।
माँग में बढ़ोतरी होने के कारण कॉटन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में कल 1.5% की बढ़ोतरी हुई है। अब कीमतें 31,100 रुपये के स्तर पर सहारा के साथ 32,000 रुपये स्तर तक पहुँच सकती है।
दो दिनों की गिरावट के बाद कल कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
कल कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों में कल 1.3% की बढ़ोतरी हुई है।
शक्रुवार को काटॅन वायदा (फरवरी) की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
बेहतर माँग के कारण कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों में 0.5% की बढ़ोतरी हुई है।
कॉटन वायदा (फरवरी) की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
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मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।