माँग में बढ़ोतरी होने की संभावना के कारण कल सोयाबीन वायदा (सितंबर) की कीमतों में ऊपरी सर्किट पर बढ़ोतरी हुई है।
एसएमसी ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में जिक्र किया है कि सोयाबीन वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में 3,950 के स्तर पर सहारे के साथ 4,300 रुपये तक बढ़त दर्ज किये जाने की संभावना है।
कम आवक के बीच लगातार माँग के कारण सोयाबीन की कीमतों में इंदौर में कल बढोतरी हुई है।
सोयाबीन की कीमतों में इंदौर में गिरावट हुई है लेकिन बढ़ती माँग के कारण कीमतों को मदद मिल रही है।
विदेशी बाजारों में तेजी के रुझान पर सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतों में कल 6% की बढ़त दर्ज की गयी।
निचले स्तर पर खरीदारी के कारण सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों में कल 0.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
खाद्य तेलों की कीमतो में गिरावट के कारण सोयाबीन वायदा (दिसम्बर) की कीमतों में भी नरमी का रुझान रहा।
सोयाबीन की बेहतर माँग के कारण सोयाबीन वायदा (दिसंबर) की कीमतें शुक्रवार को कम दायरे में रही है।
सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,240-3,270 के स्तर पर पहुँचने की संभावना हैं।
सोयाबीन वायदा (फरवरी) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,640-3,760 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (जनवरी) की कीमतें दो हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार कर रही हैं।
सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों के तेजी के रुझान के साथ 3,730-3,785 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों के 3,810 रुपये पर सहारे के साथ 3,950 रुपये के स्तर पर पहुँच जाने की संभावना है।
सोयाबीन वायदा (अगस्त) की कीमतों को 3,740 रुपये के स्तर पर सहारा रहने की संभावना है जबकि कीमतों की बढ़त पर 3,795 रुपये के नजदीक रोक लग सकती है।
सोयाबीन वायदा (नवंबर) की कीमतों के 3,965 रुपये पर सहारे के साथ 4,065-4,085 रुपये के स्तर पर पहुँच जाने की संभावना है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।