हल्दी वायदा (सितम्बर) की कीमतों के 5,720-5,850 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों को 5,720 रुपये के स्तर पर सहारा रहने की संभावना है।
हल्दी वायदा (जून) की कीमतों के 7,700-7,900 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की संभावना है।
बिकवाली के कारण हल्दी वायदा (अक्टूबर) की कीमतों में कल 1.8% की गिरावट दर्ज की गयी है। अब कीमतों के 7,850-8,150 रुपये के दायरे में सीमित करने की संभावना हैं।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 8,200 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है। उच्च स्तर पर माँग घट जाने और बढ़ी हुई आवक के बीच हल्दी की कीमतों में गिरावट हुई।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में 7,900 रुपये तक गिरावट होने की संभावना है।
निचले स्तर पर खरीदारी के कारण हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतें कल 2.3% की बढ़त के साथ बंद हुई।
हल्दी वायदा (नवम्बर) की कीमतों के 5,900-6,150 रुपये के दायरे में सीमित कारोबार करने की उम्मीद है।
हल्दी वायदा (मई) की कीमतों के 6,350-6,500 रुपये के दायरे में सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अगस्त) की कीमतों में कल बढ़ोतरी हुई है और अब कीमतों के 7,450-7,460 रुपये के स्तर पर पहुँचने की संभावना है। हल्दी की माँग स्थिर रही और प्राथमिक स्रोतों से आपूर्ति कुछ बेहतर हुई।
उच्च स्तर पर मुनाफा वसूली के कारण हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में कल 2.5% की गिरावट दर्ज की गयी है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में नरमी के रुझान के साथ 6,350 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतें 6,400 रुपये के मजबूत सहारा स्तर से नीचे टूटने के कगार पर हैं। हल्की की कीमतों में 6,315-6,200 रुपये तक गिरावट हो सकती है।
हल्दी वायदा (अगस्त) की कीमतों में कल मामूली बढ़ोतरी हुई है और अब कीमतों के 7,300-7,400 रुपये के दायरे में कारोबार करने की संभावना है।
हल्दी वायदा (अगस्त) की कीमतें कल 2 महीने के उच्च स्तर पर बंद हुई और अभी भी 7,830 रुपये के स्तर तक कारोबार करने की उम्मीद है।
हल्दी वायदा (अप्रैल) की कीमतों में हफ्ता-दर-हफ्ता गिरावट हो रही है जिससे पता चलता है कि रुझान अभी भी कमजोर है और शॉर्ट कवरिंग को 6,025 रुपये के स्तर पर रुकावट का सामना करना पड़ सकता है।
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अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।
हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए।