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बाजार में बढ़ती इंट्राडे वोलैटिलिटी के पीछे क्या है वजह? जानिए एक्सपर्ट की राय

बाजार में हाल के दिनों में बढ़ती इंट्राडे वोलैटिलिटी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 

बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव केवल रिटेल निवेशकों की वजह से नहीं, बल्कि बड़े विदेशी हेज फंड्स और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग की सक्रियता का असर भी है। खासतौर पर मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में कम लिक्विडिटी होने के कारण बड़े ऑपरेटर्स तेजी से मुनाफा बनाने में सफल हो जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह “खेल” नहीं बल्कि बेहद प्रोफेशनल और रिस्क-मैनेज्ड ट्रेडिंग का तरीका है, जहां बड़े फंड्स सख्त स्टॉप लॉस और बुकिंग लेवल के साथ काम करते हैं। 

IT सेक्टर में बढ़ी कमजोरी, हेज फंड्स बना रहे मुनाफा

सुनील सुब्रमण्यम के अनुसार इस समय सबसे ज्यादा दबाव IT सेक्टर में देखने को मिल रहा है। इसकी बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर आईटी सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंता और AI से जुड़ी अनिश्चितता है। अमेरिका में टेक इंडेक्स में हाल की गिरावट का असर भारतीय IT शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है। पहले कमजोर रुपये के दौरान IT शेयरों में खरीदारी आती थी क्योंकि इसे विदेशी निवेशकों के लिए नेचुरल हेज माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी हेज फंड्स IT इंडेक्स में शॉर्ट पोजिशन लेकर गिरावट से मुनाफा कमा रहे हैं।

हेज फंड्स के लिए शॉर्टिंग बना कमाई का बड़ा जरिया

विदेशों में हेज फंड्स के लिए शॉर्टिंग सिर्फ सुरक्षा का तरीका नहीं, बल्कि मुनाफा कमाने की रणनीति है। ये फंड्स बड़े स्तर पर लीवरेज का इस्तेमाल करते हैं और छोटे समय में तेज मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर भारतीय बाजार में भी तेज हलचल दिखाई देती है। उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास में करेंसी मार्केट में भी बड़े निवेशकों ने शॉर्टिंग के जरिए भारी मुनाफा कमाया है।

युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों से बाजार में डर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव भी बाजार की चिंता बढ़ा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार को तब तक राहत नहीं मिलेगी जब तक युद्ध खत्म होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते। हालांकि उनका अनुमान है कि अगले एक महीने के भीतर अमेरिका और ईरान किसी न किसी समझौते या “फेस सेविंग” समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं, क्योंकि लंबे समय तक युद्ध जारी रखना दोनों पक्षों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है।

(शेयर मंथन, 21 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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