भारतीय शेयर बाजार इस समय कई बड़े घरेलू और वैश्विक दबावों के बीच फंसा हुआ दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री की हालिया अपील और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि खासतौर पर बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का मतलब यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था किसी नए बड़े संकट में फंस चुकी है, बल्कि यह आने वाले आर्थिक कदमों के लिए जनता को मानसिक रूप से तैयार करने की कोशिश थी।
सरकार पहले ही समझ चुकी है कि बढ़ती तेल कीमतों और डॉलर आउटफ्लो का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी कारण सोने-चांदी पर ड्यूटी, आयात नियंत्रण और खर्च कम करने जैसे कदमों की भूमिका तैयार की जा रही है। उनका मानना है कि असली दबाव रुपये की कमजोरी और डॉलर की कमी को लेकर है। विदेशी निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में कैपिटल गेन टैक्स, कमजोर करेंसी और धीमी ग्रोथ जैसी वजहों से विदेशी निवेशकों का आकर्षण कम हुआ है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के रिश्तों को लेकर भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे अमेरिका की मजबूरी और चीन की बढ़ती ताकत के संकेत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि चीन आज वैश्विक सप्लाई चेन, रेयर अर्थ मेटल्स और तेल बाजार में काफी मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में अमेरिका खुलकर टकराव से बचना चाहता है और फिलहाल आर्थिक दबाव की रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
बाजार की चाल को लेकर शोमेश कुमार का कहना है कि फिलहाल निफ्टी में कोई बड़ा ब्रेकडाउन दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन तेज तेजी की उम्मीद भी कमजोर हो चुकी है। तकनीकी तौर पर 24,600 का स्तर सबसे बड़ा रेजिस्टेंस माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर मजबूती से बंद नहीं होता, तब तक बाजार को करेक्टिव फेज में ही माना जाएगा। दूसरी तरफ 23,000 से 22,800 के बीच मजबूत सपोर्ट की संभावना जताई जा रही है। यानी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन फिलहाल 22,000 के नीचे बड़ी गिरावट की आशंका कम मानी जा रही है।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी काफी सतर्कता देखने को मिल रही है। आने वाले समय में ऊंची महंगाई और ब्याज दरों का दबाव बैंकों पर पड़ सकता है। इसी वजह से बैंकिंग शेयरों में फिलहाल सीमित निवेश की सलाह दी जा रही है। उनका कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में अभी भी जोखिम बना हुआ है और अगले कुछ क्वार्टर के नतीजों के बाद ही स्थिति ज्यादा साफ हो पाएगी। खासतौर पर लो-क्वालिटी बैंकों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
हालांकि बाजार में पूरी तरह निराशा का माहौल भी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडेक्स भले सीमित दायरे में फंसा रहे, लेकिन चुनिंदा सेक्टर्स और कंपनी-विशेष स्टॉक्स में निवेश के अवसर बन सकते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा मौके देखने को मिल सकते हैं, खासकर उन कंपनियों में जिनकी घरेलू मांग मजबूत है। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल एक लंबे कंसोलिडेशन फेज में दिखाई दे रहा है, जहां निवेशकों को इंडेक्स के बजाय मजबूत कंपनियों और सेक्टर-विशेष अवसरों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी।
(शेयर मंथन, 22 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)