रिलायंस का शेयर पिछले करीब तीन महीनों से एक सीमित दायरे में कंसोलिडेशन करता दिखाई दे रहा है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि जून से लेकर जुलाई, अगस्त और अब सितंबर की शुरुआत तक शेयर में कोई निर्णायक दिशा नहीं बनी है। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार के मुताबिक, Reliance का चार्ट फिलहाल पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन शेयर में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर नजर आ रहे हैं। हालांकि जब तक 1,350 रुपये का महत्वपूर्ण स्तर पार नहीं होता, तब तक किसी बड़े मूव पर भरोसा करना जल्दबाजी होगी।
Reliance के लिए 1,350 रुपये का स्तर इसलिए अहम है क्योंकि इसके ऊपर क्लोजिंग निफ्टी के सेंटीमेंट को भी मजबूत कर सकती है। फिलहाल शेयर में जिस तरह का स्ट्रक्चर बना हुआ है, उसमें ऊपर की तरफ ब्रेकआउट आने पर बाजार को अतिरिक्त थ्रस्ट मिल सकता है। वहीं अगर शेयर इस स्तर के नीचे ही फंसा रहता है, तो मौजूदा कंसोलिडेशन आगे भी जारी रह सकता है। विश्लेषक के मुताबिक, अगर Reliance पहले 1,200 रुपये के आसपास तक करेक्शन कर चुका होता तो मौजूदा चार्ट ज्यादा क्लीन दिखाई देता, लेकिन शेयर करीब 1,250 रुपये के आसपास रुक गया और पूरी तरह से करेक्शन नहीं हुआ।
Reliance के लिए एक संभावित पॉजिटिव ट्रिगर Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुड़ी खबर भी हो सकती है। IPO को लेकर जरूरी मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन अभी तारीख की घोषणा बाकी है। ऐसे में IPO की डेट की घोषणा बाजार में Reliance के लिए एक पॉजिटिव ट्रिगर का काम कर सकती है। हालांकि यह निश्चित नहीं है कि इसका असर कितना और कब दिखाई देगा, लेकिन निवेशकों की नजर इस संभावित घटनाक्रम पर बनी हुई है।
Jio Platforms IPO की तारीख आने से बाजार को एक महत्वपूर्ण अनिश्चितता से स्पष्टता मिल सकती है। अभी निवेशकों को यह पता है कि IPO आना है, लेकिन तारीख स्पष्ट नहीं है। जैसे-जैसे तारीख सामने आएगी, Reliance की वैल्यू अनलॉकिंग की कहानी को लेकर बाजार की उम्मीदें भी मजबूत हो सकती हैं। इसके अलावा आने वाले समय में कंपनी के नतीजे भी शेयर के लिए संभावित ट्रिगर बन सकते हैं। इसलिए Reliance के मामले में बाजार फिलहाल किसी एक कारण पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई संभावित ट्रिगर्स की तलाश कर रहा है।
बैंकिंग इंडेक्स की बात करें तो यहां भी 56,500 का स्तर महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। जब तक बैंक निफ्टी इस स्तर को होल्ड करता है और इसके नीचे क्लोजिंग नहीं देता, तब तक ऊपर की तरफ 60,000 के आसपास जाने की संभावना बनी रह सकती है। लेकिन अगर 56,500 के नीचे क्लोजिंग आती है, तो बैंकिंग शेयरों में कमजोरी बढ़ने की आशंका होगी। यानी बैंक निफ्टी भी फिलहाल एक ऐसे दायरे में है जहां ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन आने तक स्पष्ट दिशा का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
इस समय बाजार की स्थिति कुछ ऐसी है कि बड़े इंडेक्स और प्रमुख शेयर दोनों ही किसी निर्णायक ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं। Reliance में 1,350 रुपये और बैंक निफ्टी में 56,500 जैसे स्तर आने वाले दिनों की दिशा समझने में मदद कर सकते हैं। अगर Reliance 1,350 रुपये के ऊपर निकलता है और बैंक निफ्टी 56,500 के ऊपर बना रहता है, तो बाजार में रिबाउंड की उम्मीद मजबूत हो सकती है। इसके विपरीत महत्वपूर्ण सपोर्ट टूटने पर कमजोरी का दौर लंबा खिंच सकता है। ऐसे में फिलहाल बाजार में जल्दबाजी के बजाय इन प्रमुख स्तरों और संभावित ट्रिगर्स पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है।
(शेयर मंथन, 07 सितंबर 2026)
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