शेयर मंथन में खोजें

निफ्टी (Nifty) गिर कर 8,267 पर, सेंसेक्स (Sensex) 195 अंक लुढ़का

उतार-चढ़ाव के बाद भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए। 

निफ्टी (Nifty) 8,300 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 195 अंक यानी 0.71% की गिरावट के साथ 27,506 पर रहा। निफ्टी 57 अंक यानी 0.68% गिर कर 8,267 पर बंद हुआ। सीएनएक्स मिडकैप (CNX Midcap) में 0.59% की गिरावट रही। बीएसई के स्मॉलकैप (Smallcap) में 0.64% और बीएसई मिडकैप (BSE Midcap) में 0.33% की कमजोरी रही। क्षेत्रों के लिहाज से धातु और कैपिटल गुड्स क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बिकवाली का रुख रहा।

मिले-जुले एशियाई संकेतों के बीच घरेलू बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 27,851 और निफ्टी 8,365 दिन के ऊपरी स्तरों पर रहे। हालाँकि इसके बाद बाजार में एक सीमित दायरे में कारोबार होता रहा। मिले-जुले यूरोपीय संकेतों के बीच घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा। निफ्टी 8,300 के स्तर से नीचे फिसल गया। दोपहर के कारोबार में बाजार की गिरावट बढ़ती चली गयी। इसके बाद बाजार में एक बेहद सीमित दायरे में कारोबार होता रहा। कारोबार के आखिरी मिनटों में सेंसेक्स 27,475 और निफ्टी 8,253 दिन के निचले स्तरों तक लुढ़क गये। आखिरकार, सेंसेक्स-निफ्टी आज के कारोबार में गिरावट के साथ ही बंद हुए। 

क्षेत्रों के लिहाज से धातु को सबसे ज्यादा 1.89% का घाटा हुआ। कैपिटल गुड्स में 1.46%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.39%, तेल-गैस में 096%, आईटी में 0.90%, रियल्टी में 0.77%, बैंकिंग में 0.69% और टीईसीके में 0.62% की गिरावट रही। ऑटो में 0.18%, हेल्थकेयर में 0.06% और पावर में 0.05% की कमजोरी रही। दूसरी ओर, एफएमसीजी में 0.08% की बढ़त रही। (शेयर मंथन, 23 दिसंबर 2014) 

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख