शेयर मंथन में खोजें

उतार-चढ़ाव के आसार, बाजार का रुख सकारात्‍मक : सिद्धार्थ खेमका, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services Ltd) में रीटेल रिसर्च के प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार बुधवार (31 जनवरी) को निफ्टी ने कमजोर शुरुआत के बाद अच्‍छी वापसी की और 204 अंक जोड़ कर 21726 के स्‍तर पर बंद हुआ। 

निफ्टी मिडकैप 100 में 1.6% की तेजी रही और निफ्टी स्‍मॉलकैप 100 में 2.2% की उछाल आयी और इसी के साथ व्‍यापक बाजार का प्रदर्शन भी अच्‍छा रहा। सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में बंद हुए और पीएसयू बैंक, फार्मा और रियल्‍टी सूचकांक में खरीदारी द‍िखायी दी। वैश्‍विक बाजारों को पूरी शिद्दत से ब्‍याज दरों में कटौती की समयसीमा पर अमेरिकी फेड की टिप्‍पणी का इंतजार रहेगा। घरेलू स्‍तर पर निवेशकों का फोकस बजट पर रहेगा।

अंतरिम बजट से जहाँ बहुत उम्‍मीद नहीं है, वहीं प्रमुख प्रस्‍तावों के संदर्भ में सामान्‍य उम्‍मीदें न्‍यूनतम हैं। पिछले दो साल में भारत के आर्थिक विकास की अच्‍छी रफ्तार को देखते हुए समझा जा रहा है कि सरकार फिस्‍कल कंसोलिडेशन पर ध्‍यान केंद्रित कर सकती है और राजको‍षीय घाटा लक्ष्‍य जीडीपी का 5.2% से 5.4% के बीच निर्धारित कर सकती है। चूँकि ये यूएस फेड की बैठक के नतीजों साथ घटित होगा, इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालाँकि बाजार का कुल मिलाकर रुख सकारात्‍मक नजर आ रहा है।

(शेयर मंथन, 31 जनवरी 2024) 

(आप भी किसी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख