एचडीएफसी फार्मा और हेल्थकेयर फंड ने अपनी शुरुआत के बाद से मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।
HDFC AMC के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक फंड का inception से CAGR 30.19% रहा, जबकि एक साल में इसने 19.01% रिटर्न दिया। फंड का NAV भी 31 जुलाई 2026 को 21.069 रुपये था। हालांकि, ये पिछले प्रदर्शन के आंकड़े हैं और भविष्य में भी इसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं देते।
इस फंड की खासियत इसका सेक्टर के भीतर diversified approach है। निवेश केवल दवा बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हॉस्पिटल्स, हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर्स, बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल इक्विपमेंट और अन्य हेल्थकेयर कारोबार भी इसके दायरे में आते हैं। HDFC AMC का मानना है कि भारत में हेल्थकेयर की बढ़ती मांग और इस सेक्टर में हो रहे बदलाव लंबे समय में निवेश के अवसर पैदा कर सकते हैं।
भारत के फार्मा सेक्टर में जेनेरिक दवाओं के अलावा अब बायोसिमिलर्स, स्पेशियलिटी ड्रग्स और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों का महत्व बढ़ रहा है। वहीं, घरेलू स्तर पर बढ़ता हेल्थकेयर खर्च, मेडिकल इंश्योरेंस की बढ़ती पहुंच और बदलती डेमोग्राफी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक्स जैसी सेवाओं के लिए मांग को बढ़ा सकती है। फंड के मैनेजर निखिल माथुर हैं और HDFC AMC के अनुसार फंड रिसर्च आधारित बॉटम-अप अप्रोच के जरिए अलग-अलग कंपनियों और मार्केट कैप में अवसर तलाशता है।
हालांकि निवेशकों के लिए जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह एक सेक्टोरल/थीमैटिक स्कीम है, इसलिए diversified equity mutual funds की तुलना में इसमें concentration और sector-specific risk ज्यादा हो सकता है। ऐसे में सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय फंड की रणनीति, जोखिम और निवेशक की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
(शेयर मंथन, 08 सितंबर 2026)