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क्या वायर और केबल शेयरों में 10-20% और गिरावट निवेशकों के लिए मौका बनेगी?

अल्ट्राटेक के वायर और केबल कारोबार में उतरने की खबर ने KEI Industries, Polycab, Finolex Cables और RR Kabel जैसे शेयरों में अचानक दबाव पैदा किया है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बाजार को पहले से इस एंट्री की जानकारी थी, लेकिन घोषणा के बाद निवेशकों ने संभावित प्रतिस्पर्धा और प्राइस वॉर के जोखिम को तेजी से कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि मौजूदा गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखा जाए या फिर अभी कुछ समय इंतजार करना बेहतर होगा। मौजूदा आकलन के मुताबिक, यह केवल खबर का असर नहीं है, बल्कि आगे आने वाले समय में सेक्टर की प्राइसिंग पावर और वैल्यूएशन पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता भी शेयरों में दिखाई दे रही है।

वायर और केबल सेक्टर की कहानी में डिमांड पक्ष मजबूत दिखाई देता है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, कमर्शियल और रेजिडेंशियल निर्माण तथा इंडस्ट्रियल गतिविधियों के बढ़ने के साथ वायर और केबल की जरूरत बनी रहेगी। इसलिए यहां मुख्य समस्या सेक्टर की डिमांड ग्रोथ नहीं बल्कि कंपनियों की प्राइसिंग पावर है। नई कंपनी के प्रवेश के बाद यदि बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए कीमतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तो मौजूदा कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों पर दबाव झेलना पड़ सकता है। इसका असर सीधे मार्जिन पर पड़ सकता है।

पेंट इंडस्ट्री में भी एक समय ऐसा ही दौर देखने को मिला था। नई प्रतिस्पर्धा आने के बाद प्राइस वॉर और मार्जिन प्रेशर बढ़ा, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति स्थिर हुई। इसी आधार पर वायर और केबल सेक्टर में भी माना जा रहा है कि शुरुआती दबाव के बाद इंडस्ट्री धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में एक-दो वित्तीय वर्षों का समय लग सकता है। इस दौरान कंपनियों के मार्जिन और बाजार द्वारा दिए जाने वाले वैल्यूएशन मल्टीपल दोनों पर दबाव रहने की आशंका है।

अगर किसी कंपनी का वैल्यूएशन पहले 40-60 गुना के स्तर पर था और प्रतिस्पर्धा के कारण बाजार उसे 25-35 गुना के आसपास वैल्यू करने लगे, तो कंपनी की कमाई में बड़ी गिरावट न होने के बावजूद शेयर की कीमत में पर्याप्त करेक्शन आ सकता है। इसी वजह से मौजूदा स्तरों से 10-20% अतिरिक्त दबाव की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। बड़े संगठित खिलाड़ियों के पास मजबूत ब्रांड, वितरण नेटवर्क और कुछ हद तक प्राइसिंग पावर होने के कारण वे प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकते हैं, लेकिन उन्हें भी मार्जिन में कुछ गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए वायर और केबल शेयरों में मौजूदा गिरावट को तुरंत 'सस्ता' मानना सही रणनीति नहीं होगी। आने वाले समय में यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि प्राइस वॉर कितना गंभीर होता है, मार्जिन कहां जाकर स्थिर होते हैं और वैल्यूएशन किस स्तर पर पहुंचते हैं। अगर सेक्टर की डिमांड मजबूत रहती है और प्रतिस्पर्धा के बाद कंपनियां अपनी मार्जिन स्थिति संभाल लेती हैं, तो लंबे समय में अवसर बन सकते हैं। लेकिन फिलहाल बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस नए प्रतिस्पर्धी दौर में कंपनियों की प्राइसिंग पावर कितनी बचती है।


(शेयर मंथन, 08 सितंबर 2026)

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