बाजार के लिए इस समय ब्रेंट क्रूड एक बड़ा जोखिम बना हुआ है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई समेत अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम भी तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर आगे का अनुमान लगाना मुश्किल है। अगर तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें 105, 110, 120 डॉलर या उससे ऊपर जाती हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए बाजार की दिशा का आकलन करना और भी मुश्किल हो जाता है।
(शेयर मंथन, 14 सितंबर 2026)
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