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अमिताभ चक्रवर्ती

कम ही लोग समझ सके इस सूनामी को

अमिताभ चक्रवर्ती, प्रेसिडेंट (इक्विटी) रेलिगेयर सिक्योरिटीज

साल 2008 में शेयर बाजार इकतरफा ही रहा है। जनवरी में सेंसेक्स 21,000 से भी ऊपर था और आज की तारीख में यह वहाँ से करीब 55 फीसदी नुकसान पर है। पीई मूल्यांकन लगभग 10 पर आ गया है, जो मंदी के बाजार का बिल्कुल निचला स्तर है। अमेरिका के सबप्राइम संकट की वजह से नकदी की जबरदस्त कमी झेलनी पड़ा, जिसके चलते कई वित्तीय संस्थाएँ टूट गयीं। तमाम देशों ने इस स्थिति का सामना करने क लिए काफी मौद्रिक और नीतिगत उपाय किये हैं। अमेरिका में डी-लेवरेजिंग की वजह से वैश्विक स्तर पर माँग में कमी आयी है। इसके कारण चीन में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा है। 

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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