इस समय शेयर बाजार की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कच्चे तेल की कीमतें निभाएंगी।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिककर बंद होता है, तो यह केवल एक सामान्य तेजी नहीं बल्कि बड़ी आर्थिक चिंता का संकेत हो सकता है। ऐसे हालात में कच्चे तेल के 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई, कंपनियों की लागत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। यही वजह है कि निवेशकों को केवल शेयरों के चार्ट ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार पर भी लगातार नजर रखने की जरूरत है।
फिलहाल बाजार में आई गिरावट को देखकर तुरंत यह मान लेना कि अगले ही दिन जोरदार रिकवरी होगी, सही रणनीति नहीं है। बाजार में अत्यधिक आशावाद या अत्यधिक डर—दोनों से बचना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में संयमित दृष्टिकोण अपनाना अधिक समझदारी होगी। अगले कुछ दिनों में यदि कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के नीचे स्थिर रहती हैं और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में फिर से खरीदारी के अवसर बन सकते हैं। लेकिन यदि तेल लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो निवेशकों को जोखिम कम रखने और नए निवेश से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 11 जुलाई 2026)
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