शेयर मंथन में खोजें

चाँदी में तेजी या करेक्शन? निवेशकों के लिए क्या हैं बड़े संकेत

सोने की तुलना में चाँदी का बाजार पिछले कुछ समय से अधिक उतार-चढ़ाव वाला बना हुआ है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि चाँदी एक कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है, इसलिए इसकी कीमतें केवल सुरक्षित निवेश की माँग से नहीं बल्कि वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों से भी प्रभावित होती हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में बढ़ते उपयोग के कारण चाँदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि हाल के महीनों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनावों ने इसकी चाल को प्रभावित किया है। यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार आता है और औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है, तो चांदी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।

चाँदी की कीमतों में फिलहाल एक निर्णायक चरण चल रहा है। यदि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है और औद्योगिक मांग मजबूत रहती है, तो चांदी सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। दूसरी ओर, यदि वैश्विक विकास दर कमजोर पड़ती है और निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, तो चांदी में कुछ समय के लिए दबाव भी देखा जा सकता है। तकनीकी रूप से भी कई विशेषज्ञ महत्वपूर्ण समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंकों की नीतियां, डॉलर की चाल और वैश्विक औद्योगिक मांग यह तय करेगी कि चांदी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगी या फिर एक बड़े कंसोलिडेशन चरण में प्रवेश करेगी। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए चाँदी अभी भी एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बनी हुई है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को बाजार की अस्थिरता के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

(शेयर मंथन, 03 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ फंड - निवेश मंथन (मई 2026)

    पिछले दो वित्त-वर्ष शेयर बाजार और उसके साथ ही इक्विटी केंद्रित म्यूचुअल फंडों के लिए भी आशा-निराशा के बीच झूलते रहने वाले साबित हुए हैं। इस उठापटक ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंडों के प्रतिफल (रिटर्न) को बुरी तरह चोट पहुँचायी है। इस लिहाज से 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले फंडों का चयन करना एक सहज अध्ययन नहीं है। 

  • युद्ध, तेल संकट और महँगाई : सरकार क्यों दिखा रही बचत की राह - निवेश मंथन (अप्रैल 2026)

    प्रधानमंत्री मोदी की मितव्ययिता की अपील ने देश में खतरे की घंटी बजा दी है। सरकार हाल तक “सब ठीक है” का भरोसा दिला रही थी, पर अब प्रधानमंत्री ने पूरे देश को एकजुट होकर संकट का सामना करने का संदेश दे दिया है। 

देश मंथन के आलेख