शेयर मंथन में खोजें

क्यों एक दिन चढ़ रहा और दूसरे दिन टूट रहा है शेयर बाजार?

बाजार की मौजूदा स्थिति को समझना आसान नहीं है, क्योंकि एक दिन तेजी और दूसरे दिन गिरावट का सिलसिला जारी है। इस अस्थिरता के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल और मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितता है।

बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यमका कहना है कि अभी बाजार को सपोर्ट देने वाले ट्रिगर्स कमजोर हैं। खासकर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, ईरान से जुड़े जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों के मन में डर और भ्रम पैदा कर रखा है, जिससे बाजार में स्थिरता नहीं बन पा रही है।

बाजार की चाल को समझने के लिए तीन प्रमुख खिलाड़ियों- एफआईआई (Foreign Institutional Investors), डीआईआई (Domestic Institutional Investors) और रिटेल निवेशकों की गतिविधियों को देखना जरूरी है। हाल के दिनों में एफआईआई की बिकवाली में थोड़ी कमी आई थी, जिससे बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे थे। लेकिन जैसे ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा, एफआईआई ने फिर से भारी बिकवाली शुरू कर दी। इसका असर यह हुआ कि रिटेल निवेशक और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स भी घबरा गए और उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

वहीं डीआईआई की रणनीति थोड़ी अलग रही। उन्होंने शुरुआती दिनों में खरीदारी की, लेकिन बाद में प्रॉफिट बुकिंग कर कैश पोजीशन बढ़ाई ताकि अर्निंग सीजन के दौरान बेहतर अवसरों का फायदा उठाया जा सके। यही वजह है कि बाजार में “गोला-बारूद” यानी निवेश के लिए उपलब्ध कैश मौजूद है, लेकिन उसे सही समय का इंतजार है। इसके अलावा, एडवांस-डिक्लाइन रेशियो जैसे संकेतकों से भी साफ दिखा कि हफ्ते की शुरुआत में तेजी थी, लेकिन अंत तक गिरावट का दबाव बढ़ गया, जो रिटेल निवेशकों की बदलती मानसिकता को दिखाती है।

फिलहाल बाजार एक “नर्वस फेज” में है, जहां लालच और डर दोनों का प्रभाव तेजी से बदलता रहता है। उदाहरण के तौर पर, नेस्ले इंडिया के अच्छे नतीजों ने पूरे FMCG सेक्टर को ऊपर खींच लिया, जबकि Infosys के कमजोर संकेतों ने आईटी सेक्टर में दबाव बना दिया। इसका मतलब है कि बाजार अभी सेक्टर-विशेष खबरों पर ओवररिएक्ट कर रहा है।

आगे की दिशा काफी हद तक दो चीजों पर निर्भर करेगी, जियोपॉलिटिकल स्थिति और अर्निंग सीजन। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं अर्निंग सीजन से कंपनियों की भविष्य की गाइडेंस स्पष्ट होगी, जिससे यह तय होगा कि मौजूदा वैल्यूएशन सही है या नहीं। फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है सतर्क रहना, जल्दबाजी में निर्णय न लेना और बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना।

 



(शेयर मंथन, 01 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

देश मंथन के आलेख