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आगे बाजार के अच्छे प्रदर्शन की आशा

surendra goelसुरेंद्र कुमार गोयल
निदेशक, बोनांजा पोर्टफोलिओ
भारतीय बाजार के लिए चिंता के मुख्य बिंदु कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, रुपये की कमजोरी, फेडरल दरों में वृद्धि की आशंका आदि हैं।

साथ ही बाजार की नजर है कि जीएसटी पर किस तरह अमल होता है, विमुद्रीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था कैसे पटरी पर आती है और उत्तर प्रदेश एवं पंजाब जैसे कुछ राज्यों में चुनाव के नतीजे क्या रहते हैं। सकारात्मक बात यह है कि संसद में विपक्षी दलों के लगातार नकारात्मक रुख के बावजूद सरकार नियमित रूप से सुधारों को आगे बढ़ा रही है। मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में है। हमारे बाजार ने पिछले दो कैलेंडर वर्षों में बढ़िया प्रदर्शन नहीं किया है, इसलिए अब बढ़िया प्रदर्शन की उम्मीद ज्यादा है। मौजूदा स्तरों से गिरावट की गुंजाइश सीमित है और उच्च प्रतिफल की उम्मीद की जा सकती है। (शेयर मंथन, 03 जनवरी 2017)

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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