शेयर मंथन में खोजें

दायरे में बँधा बाजार, सेंसेक्स 86,159 के पार जाने पर आयेगी तेजी

हितेंद्र वासुदेव

ट्रेंड रिपोर्टर

मैं दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स को 84,300 और निफ्टी को 26,098 के स्तर पर देखता हूँ। अगले 12 महीनों के लिए मेरा सेंसेक्स लक्ष्य 98,730 और निफ्टी का लक्ष्य 30,289 है। मैं सेंसेक्स को 2027 में 1 लाख के स्तर पर पहुँचते देखता हूँ।

तकनीकी दृष्टि से सेंसेक्स के लिए 71,425-70,000 के बीच समर्थन (सपोर्ट) स्तर बन रहे हैं, जबकि 85,883-86,159 का क्षेत्र प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का काम कर रहा है। जब भी सेंसेक्स को 86,159 के ऊपर नयी चाल (ब्रेकआउट) मिलेगी, तब कम-से-कम 96,700 और उसके बाद 1,13,000 तक की तेजी की संभावनाएँ बन सकती हैं।

निफ्टी के लिए वर्ष 2024 से 22,182-21,743-21,137 के स्तरों पर समर्थन क्षेत्र बना हुआ है। वर्ष 2024 से इसका दायरा 21,137 से 26,373 के बीच का रहा है। जब निफ्टी नयी चाल पकड़ कर इस दायरे के ऊपर बंद होगा, तब कम-से-कम 29,100 और अंततः 33,000 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नयी चाल बनने तक यह दायरा कितने लंबे समय तक चलता रहता है। 

बाजार में सितंबर 2024 से एक दायरे के अंदर का उतार-चढ़ाव (साइडवेज वोलैटिलिटी) या ठहराव (कंसोलिडेशन) देखने को मिल रहा है। यदि दिसंबर 2026 या 2027 की शुरुआत तक यह नयी चाल पकड़ लेता है, तो इसके बाद आने वाली तेजी 3 साल तक टिक सकती है। ठहराव जितने लंबे समय तक रहेगा, उसके बाद आने वाली टिकाऊ तेजी की अवधि भी उतनी ही लंबी हो सकती है। किसी उतार-चढ़ाव में समर्थन क्षेत्र के आस-पास तक गिरावट निचले भावों पर शेयरों को जमा (एकम्युलेट) करने का अवसर देगी। लंबी अवधि में प्रतिफल (रिटर्न) हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका इंडेक्स ईटीएफ के माध्यम से निवेश करना हो सकता है।

इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट एक बड़ा सकारात्मक कारक है, जबकि एफआईआई की बिकवाली बाजार के लिए नकारात्मक है। अगले 12 महीनों में मैं भारतीय बाजार के प्रदर्शन को वैश्विक बाजारों के अनुरूप देखता हूँ। 

अगले छह महीनों में भारतीय बाजार के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर, तिमाही नतीजे, महँगाई और ब्याज दरें महत्वपूर्ण कारक रहेंगी। अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक असर पड़ा है। मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता हो सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दिसंबर 2026 तक हो जाने की आशा की जा सकती है। यदि अगले 3-6 महीनों में यह समझौता होता है, तो इसका भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

ब्याज दरों के संदर्भ में मेरा मानना है कि मौजूदा रुझान सट्टा आधारित तेजी के बजाय स्थिर, आय आधारित रिटर्न की ओर संकेत करते हैं। यदि वैश्विक एआई बुलबुला फूटता है, तो इसका असर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के मूल्यांकन (वैल्यूएशन) के लिए नकारात्मक होगा, लेकिन भारत की ओर पूँजी प्रवाह लौटने से भारतीय बाजार को फायदा हो सकता है। अगले 6 महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मजबूत घरेलू माँग भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 95-99 के दायरे में रह सकती है। 

मुझे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कॉर्पोरेट आय में वृद्धि 0-10% के दायरे में होगी। वित्तीय सेवाएँ (फाइनेंशियल सर्विसेज), स्वास्थ्य सेवाएँ एवं दवा (हेल्थकेयर-फार्मा) और कैपिटल गुड्स एवं बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि आईटी क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर सकता है। अगले 12 महीनों के लिए मेरी प्रमुख पसंद आईसीआईसीआई बैंक, श्रीराम फाइनेंस, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो और एलऐंडटी हैं।

(शेयर मंथन, 19 जुलाई 2026)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • अगले 6-12 महीनों में तेज वापसी की आशा - निवेश मंथन (जून 2026)

    बाजार में इस साल की शुरुआत में यह धारणा दिख रही थी कि 2025 खराब गया है, पर 2026 उससे बेहतर होगा। आधा साल बीतने के बाद यह तो स्पष्ट है कि भूराजनीति और ट्रंप ने तब बाजार को जितना डरा रखा था, उनका वास्तविक असर उससे काफी बुरा रहा। 

  • 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ फंड - निवेश मंथन (मई 2026)

    पिछले दो वित्त-वर्ष शेयर बाजार और उसके साथ ही इक्विटी केंद्रित म्यूचुअल फंडों के लिए भी आशा-निराशा के बीच झूलते रहने वाले साबित हुए हैं। इस उठापटक ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंडों के प्रतिफल (रिटर्न) को बुरी तरह चोट पहुँचायी है। इस लिहाज से 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले फंडों का चयन करना एक सहज अध्ययन नहीं है। 

देश मंथन के आलेख