शेयर मंथन में खोजें

व्यावसायिक गाड़ियों के लिए लिबरटिन तकनीक का इस्तेमाल करेगी अशोक लेलैंड

ऑटो कंपनी अशोक लेलैंड ने व्यावसायिक गाड़ियों के विस्तार के लिए तकनीक का सहारा लेगी। इसके लिए कंपनी ने एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया है।

 अशोक लेलैंड ने इंग्लैंड की कंपनी लिबरटिन होल्डिंग्स के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया है। कंपनी ने व्यावसायिक गाड़ियों के पावरट्रेन के लिए यह करार किया है। कंपनी ने यह समझौता पत्र लिबरटिन तकनीक प्लैटफॉर्म के इस्तेमाल के आकलन के लिए किया है। समझौते पत्र के शर्तों के तहत अशोक लेलैंड लिबरटिन तकनीक के लिए ड्यू डिलिजेंस (Due diligence) करेगी। कंपनी अपने व्यावसायिक गाड़ियों के पोर्टफोलियो के क्षेत्र में लीनियर जेनरेटर प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए अवसर तलाशने पर फोकस करेगी। अशोक लेलैंड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और एडवांस इंजीनियरिंग के हेड कनकसबपथी सुब्रमण्यन ने कहा कि, लिबरटिन तकनीक आंतरिक दहन इंजन यानी इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) के लिए एक लॉजिकल इवोल्यूशन यानी तार्किक विकास है। इस तकनीक के जरिए ऐसा सॉफ्टवेयर डिजाइन किया जाता है जिसका इस्तेमाल एक साथ कई तरह के ईंधन के लिए किया जा सकता है। लिबरटिन कंपनी का गठन 2009 में किया गया था। लिबरटिन ने ओईएम (OEM) यानी ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के पावरट्रेन के लिए टेक्नोलॉजी प्लैटफॉर्म सॉल्यूशन विकसित किया है। इससे रिन्युएबल ईंधन से प्रभावी और क्लीन ऊर्जा पैदा करने में मदद मिलती है। आपको बता दें कि अशोक लेलैंड व्यावसायिक गाड़ियों के भारत में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। साथ ही बसों के मामले में कपनी विश्व की चौथी सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है। जहां तक ट्रकों के उत्पादन का सवाल है तो कंपनी विश्व की 19वीं सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है।

 

(शेयर मंथन 11 सितंबर, 2022)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख