शेयर मंथन में खोजें

स्ट्राइड्स फार्मा बोर्ड से सीडीएमओ, सॉफ्ट जिलेटिन कारोबार के डीमर्जर को मंजूरी

स्ट्राइड्स फार्मा के बोर्ड ने एक अहम फैसला लिया है। स्ट्राइड्स फार्मा और स्टेरिसाइंस स्पेश्यालिटिज प्राइवेट लिमिटेड ने स्कीम ऑफ अरैंजमेंट को मंजूरी दी है। बोर्ड ने सीडीएमओ (CDMO) यानी कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट ऐंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन (Contract Development & Manufacturing Organization) कारोबार को अलग करने का फैसला किया है।

 इसके साथ हीं बोर्ड ने सॉफ्ट जिलेटिन कारोबार को भी अलग करेगी। कंपनी यह कारोबार स्टेलिस बायोफार्मा में ट्रांसफर करेगी। कंपनी के इस डीमर्जर के फैसले के तहत स्ट्राइड्स फार्मा के 2 शेयरों के बदले स्टेलिस बायोफार्मा के 1 शेयर मिलेंगे। प्रस्तावित डीमर्जर को 1 अप्रैल 2024 तक पूरा होने की उम्मीद है। डीमर्जर के तहत सट्राइड्स फार्मा के चिन्हित सीडीएमओ और सॉफ्ट जिलेटिन कारोबार को स्टेलिस में ट्रांसफर किया जाएगा। स्टेरिसाइंस के चिन्हित सीडीएमओ कारोबार को स्टेलिस फार्मा में ट्रांसफर किया जाएगा। स्ट्राइड्स फार्मा स्टेरिसाइंस स्पेश्यालिटिज के 1 शेयर के बदले स्टेलिस के 1515 शेयर देगी। खास बात यह है कि स्ट्राइड्स फार्मा और स्टेरिसाइंस के शेयरहोल्डिंग में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। प्रोमोटोर की स्टेलिस में हिस्सेदारी इस डीमर्जर के बाद 29 फीसदी से बढ़कर 39 फीसदी हो जाएगी।

इस डीमर्जर योजना को सेबी (SEBI), शेयरधारकों, कंपनी के क्रेडिटर्स और एनसीएलटी (NCLT) से मंजूरी मिलना बाकी है। डीमर्जर योजना के तहत नई कंपनी अगले 12-15 महीनों में एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) पर लिस्ट होगी। कारोबार के डीमर्जर के फैसले के बाद स्ट्राइड्स फार्मा का शेयर 8.21% चढ़ कर 539.70 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ।

 

(शेयर मंथन, 25 सितंबर 2023)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख