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कंपनियों की सुर्खियाँ

32 फीसदी प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुआ केंस टेक्नोलॉजी

केंस टेक्नोलॉजी (Kaynes Technology) ने शेयर बाजार में अपनी पारी की शुरुआत की। कंपनी का इश्यू प्राइस 587 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी का शेयर बीएसई (BSE) पर 775 रुपये प्रति शेयर वही एनएसई (NSE) पर शेयर 778 प्रति शेयर पर सूचीबद्ध (लिस्ट) हुआ।

ग्लेनमार्क फार्मा का कैंसर की दवा के लिए फाइजर के साथ निपटारा

ग्लेनमार्क फार्मा ने दवा कंपनी फाइजर के साथ निपटारा को लेकर करार किया है। कंपनी ने Axitinib टैबलेट के लिए निपटारा किया है। Axitinib टैबलेट के 1 एमजी और 5 एमजी क्षमता वाले दवा के लिए निपटारा किया है। कैंसर के इलाज में दवा का इस्तेमाल होता है।

सिंगापुर सब्सिडियरी को अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर से दवा के लिए मंजूरी

 स्ट्राइड्स फार्मा साइंस लिमिटेड के सिंगापुर सब्सिडियरी को अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर यानी यूएसएफडीए (USFDA) से दवा को मंजूरी मिली है। कंपनी की सब्सिडियरी को जेनरिक पोटैशियम क्लोराइड ओरल सॉल्यूशन के लिए मंजूरी मिली है।

नाइट्रिक एसिड की आपूर्ति के लिए दीपक फर्टिलाइजर और आरती इंडस्ट्रीज के बीच करार

केमिकल सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियां आरती इंडस्ट्रीज और दीपक फर्टिलाइजर ने लंबी अवधि के करार का ऐलान किया है। दोनों कंपनियों ने यह करार 20 साल की अवधि के लिए किया है। दोनों कंपनियों ने बाइडिंग टर्म शीट पर हस्ताक्षर किया है।

सन फार्मा को ऑर्फन ड्रग के लिए यूएसएफडीए से मंजूरी

सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज को अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर यानी यूएसएफडीए (USFDA) से एक फॉर्मूलेशन के लिए मंजूरी है। इसका नाम 'SEZABY' है। इसका इस्तेमाल छोटे बच्चों में मिर्गी के इलाज के लिए किया जाता है।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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