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कंपनियों की सुर्खियाँ

टीपीजी इक्विटी फर्म ने कैंपस एक्टिववियर में 7.62 फीसदी हिस्सेदारी बेची

प्राइवेट इक्विटी फर्म टीपीजी (TPG) ने स्पोर्ट्स ऐंड एथेलिजर फुटवियर कंपनी कैंपस एक्टिववियर में 7.62 फीसदी हिस्सेदारी बेची है।कंपनी ने यह हिस्सेदारी ओपन मार्केट के जरिए बेची है। कंपनी ने 7.6 फीसदी हिस्सेदारी 806 करोड़ रुपये में बेची है।

अदाणी पावर ने सपोर्ट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड में 100 फीसदी हिस्सा बेचा

अदाणी पावर ने सपोर्ट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड यानी एसपीपीएल (SPPL) में 100 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है। कंपनी ने यह हिस्सेदारी अदाणीकॉनेक्स (AdaniConnex) प्राइवेट लिमिटेड को 1556 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर बेची है।

अंतरिम डिविडेंड पर विचार के लिए 28 मार्च को वेदांता की बोर्ड बैठक

वेदांता के बोर्ड की अगली बैठक अगले सप्ताह होगी। कंपनी ने यह बोर्ड बैठक वित्त वर्ष 2023 के लिए पांचवे अंतरिम डिविडेंड के लिए बुलाई है। कंपनी की ओर से यह ऐलान एक दिन के बाद आया है जब वेदांता लिमिटेड के मेजोरिटी शेयरधारक (अधिकांश हिस्सा रखने वाली) वेदांता रिसोर्सेज ने कहा कि कंपनी के पास कर्ज चुकाने को लेकर पर्याप्त रकम है।

हीरो मोटोकॉर्प,मारुति सुजुकी का अप्रैल से गाड़ियों की कीमत बढ़ाने का ऐलान

 हीरो मोटोकॉर्प ने अप्रैल से अपने गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने यह फैसला उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण लिया है।

अर्थराइटिस की दवा के लिए जायडस लाइफसाइंसेज की सब्सिडियरी को मंजूरी

जायडस लाइफसाइंसेज को Tofacitinib (टोफासिटिनीब) दवा के 5 मिलीग्राम लिए अंतिम मंजूरी मिली है। वहीं Tofacitinib दवा के 10 मिलीग्राम के लिए शुरुआती मंजूरी मिली है।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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