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समय पर नहीं मिलता पीएफ का पैसा? जानिए क्या है क्लेम करने का आसान तरीका

अगर आप भी किसी ऑफिस में काम करते हैं और सैलरी पाते हैं तो प्रॉविडेंट फंड यानी पीएफ के बारे में जानते होंगे। यह सैलरी से बचत करने का शानदार तरीका है। अधिकांश लोग पीएफ के पैसे का इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए करते हैं।

शेयर बाजार में इंसानों पर हावी हुई मशीन, एनएसई ने दिया ये चौंकाने वाला आँकड़ा

शेयर बाजार में मशीनों द्वारा ट्रेडिंग की मात्रा लगातार बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि अब तो मशीनों ने ट्रेडिंग के मामले में भारतीय बाजार में इंसानों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह पहली बार पिछले वित्त वर्ष के दौरान हुआ है।

अस्थिरता के बीच मोतीलाल ओसवाल के ये 5 डिविडेंड यील्ड वाले चुनिंदा स्टॉक दिलायेंगे सुरक्षा

व्यापार जगत में वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बीच शेयर बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ में अस्थायी तौर पर राहत मिली है, मगर अमेरिकी राष्ट्रपति के फरमानों को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों के पोर्टफोलियो को सुरक्षा का मार्जिन देने के लिए ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट ने 6 महीने के नजरिये से 5 उच्च लाभांश उपज (डिविडेंड यील्ड) वाले स्टॉक की बास्केट (टोकरी या समूह) पेश किया है। 

खुदरा महँगाई 67 महीनों के निचले स्तर पर आयी, राहत के लिए ये कारण रहे जिम्मेदार

महँगाई भले ही अब भी आपके लिए सिर दर्द बनी हुई हो। लेकिन सरकार के आँकड़े बताते हैं कि खुदरा महँगाई घटी है। और ये गिरावट एक दो नहीं बल्की 67 महीनों यानी करीब साढ़े पाँच साल के निचले स्तरों पर पहुँच गयी है। 

कंपनियों की सुर्खियाँ

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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