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क्रेडिट कार्ड से ईएमआई पर खरीदते हैं सामान, जान लें इसके फायदे और नुकसान

आजकल बड़ी संख्या में लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर अपने मोबाइल बिल से लेकर हर तरह का भुगतान करते हैं। क्रेडिट कार्ड पर ई-कॉमर्स वेबसाइट्स तरह-तरह के ऑफर  भी देती हैं, जिसके कारण लोग ऑनलाइन शॉपिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

मार्च में अव्वल रहा भारतीय बाजार, आगे अच्छी संभावनाएँ : मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल

मार्च में भारतीय बाजार न सिर्फ लगातार 5 महीने से चली आ रही गिरावट से उबरने में सफल हुआ, बल्कि वृद्धि के मामले में अन्य वैश्विक बाजारों से भी आगे निकल गया। अब मोतीलाल ओसवाल की एक ताजा रिपोर्ट आगे की संभावनाओं के बारे में बता रही है।

गिरावट से आकर्षक हुए बाजार, संपत्ति आवंटन का धर्म निभायें निवेशक : नीलेश शाह

भारतीय शेयर बाजार में आज आयी तीव्र गिरावट वैश्विक घटनाक्रम का परिणाम है। ट्रंप की टैरिफ घोषणा के बाद के वर्तमान बाजार ट्रेंड पर कोटक महिंद्रा एएमसी के एमडी नीलेश शाह का कहना है कि टैरिफ युद्ध से उपजी अनिश्चितता का आकलन करने में बाजार असमर्थ है। ये आने वाले प्रत्येक खबर पर प्रतिक्रिया दे रहा है। 

देश की अर्थव्यवस्था विशाल और मजबूत, बाजार में ज्यादा दिन नहीं रहेगी अस्थिरता : ए बालासुब्रमण्यन

भारतीय शेयर बाजार में आयी आज की गिरावट कोरोना काल के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इस बारे में आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के एमडी-सीईओ ए बालासुब्रमण्यन का कहना है कि भारतीय बाजार की हाल की गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक धारणा में आये बदलाव के कारण है, खासतौर से ट्रंप द्वारा टैरिफ घोषणाओं के बाद, जिससे व्यापार गतिशीलता और मुद्रास्फीति के बारे में अनिश्चितता बढ़ गयी है। ये घटनाक्रम वैश्विक विकास और आर्थिक स्थिरता पर चिंता उत्पन्न कर रहा है। 

कंपनियों की सुर्खियाँ

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  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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