विश्व बैंक ने अगले साल के लिए चीन के विकास दर के अपने अनुमान में कमी कर दी है। उसका कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद साल 2009 में चीन की अर्थव्यवस्था में 7.5% की दर से वृद्धि दर्ज की जायेगी। ध्यान रहे कि कुछ महीने पहले विश्व बैंक ने चीन की अर्थव्यवस्था के 9.2% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया था। बैंक ने इस साल के चीन के विकास दर के अनुमान को भी 9.8% से घटा कर 9.4% कर दिया है। बैंक का मानना है कि अमेरिका, जापान और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं में आयी मंदी का असर निश्चित तौर पर चीन पर पड़ेगा। विश्लेषकों के विचार में यदि विश्व भर में लोगों की क्रय शक्ति पर असर पड़ेगा, तो निश्चय ही इन देशों में चीन द्वारा निर्यात की गयी वस्तुओं को खरीदने वालों की संख्या में कमी आयेगी।
सोमवार को यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में भारी उछाल दर्ज किये जाने के बाद मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मजबूती देखी गयी, हालांकि चीन के शंघाई कंपोजिट सूचकांक में हल्की कमजोरी रही। जापान के निक्केई सूचकांक में 5.22% की बढ़त रही। हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में 3.38% की मजबूती दर्ज की गयी। ताइवान वेटेड सूचकांक में 2.55% की बढ़त रही, जबकि दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का सूचकांक कॉस्पी 1.36% चढ़ने के बाद बंद हुआ। सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स सूचकांक में 1.23% की मजबूती दर्ज की गयी। जकार्ता कंपोजिट में 1.12% की बढ़त देखी गयी।उधर यूरोपीय बाजारों में मंगलवार के कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई है।
केएसऑयल्स ने बीएसई को भेजे गये एक प्रेस विज्ञप्ति में सूचित किया है कि उसने हल्दिया में 1.5 अरब रुपये में एंबो एग्रो प्रोडक्ट्स की एडिबल ऑयल रिफाइनरी (परिशोधनशाला) को खरीदने का निर्णय किया है। इस खबर के आने के बाद आज केएस ऑयल्स के शेयरों में बढ़त का रुख है। बीएसई में 12.50 बजे केएस ऑयल्स के शेयरों में 4.96% की तेजी है।
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन ने बीएसई को भेजे गये एक प्रेस विज्ञप्ति में सूचित किया है कि उसने कृष्णा गोदावरी अपतट में यमन तट से 15 किमी दूर तेल के महत्वपूर्ण भंडारों की खोज की है। इस खबर के आने के बाद आज ओएनजीसी में मजबूती दिख रही है। बीएसई में 12.25 बजे ओएनजीसी के शेयरों में 4.92% की तेजी है, जबकि बीएसई का तेल-गैस सूचकांक इस समय केवल 2.2% की बढ़त पर चल रहा है।
मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।