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राहतों का महीना बना मई, कच्‍चे तेल के दाम गिरने से कम हुआ व्‍यापार घाटा

मई का महीना पूरे देश के लिए राहत की सौगात लेकर आया है। खुदरा और थोक महँगाई के मोर्चे पर राहत मिलने के बाद व्‍यापार घाटा के भी कम होने की खबर है। मई के महीने में देश का व्‍यापार घाटा कम हो कर 21.88 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल मई में 22 अरब डॉलर था। 

खाने-पीने की चीजें हुईं सस्‍ती तो घटी थोक महँगाई, मई में 14 महीनों के निचले स्‍तर पर आयी

आम आदमी को खुदरा महँगाई के मोर्चे पर राहत मिलने के बाद थोक महँगाई में भी राहत मिलने की खबर आयी है। मई में थोक मूल्‍य सूचकांक आधारित महँगाई दर घट कर माह-दर-माह आधार पर 0.39% रह गयी है। खबरों के मुताबिक सबसे ज्‍यादा गिरावट प्‍याज, सब्जियों और ईंधन के दाम में आयी है।

एनएसई को इलेक्‍ट्र‍िसिटी फ्यूचर सौदे शुरू करने की मंजूरी मिली, एक्‍सचेंज को होंगे ये फायदे

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अब बाजार नियामक सेबी से इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च करने की मंजूरी मिल गई है। एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ, आशीष कुमार चौहान ने इसे इलेक्ट्रिसिटी डेरिवेटिव्स मार्केट के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत बताया है।

अगले 2 महीने में भारत में इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है स्‍टारलिंक, ये होगा मासिक प्‍लान और उपकरण मूल्‍य

एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक अब भारत में कदम रखने के बेहद करीब है। टेलीकॉम मंत्रालय से जरूरी लाइसेंस मिलने के बाद, कंपनी अगले दो महीनों में अपनी सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है। इसका मकसद देश के उन इलाकों में तेज इंटरनेट पहुँचाना है जहाँ अभी तक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क ठीक से काम नहीं करते – खासकर दूर-दराज के गाँवों और पहाड़ी क्षेत्रों में।

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निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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