शेयर मंथन में खोजें

खाने-पीने की चीजें हुईं सस्‍ती तो घटी थोक महँगाई, मई में 14 महीनों के निचले स्‍तर पर आयी

आम आदमी को खुदरा महँगाई के मोर्चे पर राहत मिलने के बाद थोक महँगाई में भी राहत मिलने की खबर आयी है। मई में थोक मूल्‍य सूचकांक आधारित महँगाई दर घट कर माह-दर-माह आधार पर 0.39% रह गयी है। खबरों के मुताबिक सबसे ज्‍यादा गिरावट प्‍याज, सब्जियों और ईंधन के दाम में आयी है।

मई महीने के थोक महँगाई दर के आँकड़े सोमवार (16 जून) को जारी हुए, जो मार्च 2024 के बाद 14 महीनों के निचले स्‍तर पर आ गयी है। विशेषज्ञों ने इस अवधि में डब्‍लूपीआई आधारित महँगाई दर के 0.80% पर रहने का अनुमान जताया था।

मई महीने में प्राथमिक वस्‍तुओं की थोक महँगाई -1.44% से घटकर -2.02% पर रही, वहीं खाने-पीने की चीजों में थोक महँगाई 2.55% से गिर कर 1.72% पर आ गयी है। इस अ‍वधि में जहाँ विनिर्माण क्षेत्र की थोक महँगाई  2.62% से कम हो कर 2.04% पर आ गयी। 

मई में आलू की थोक महँगाई -24.30% से घटकर -29.42% पर आ गयी, जबकि प्‍याज के थोक मूल्‍य में 0.20% से घट कर -14.41% पर आ गये। इसी तरह सब्जियों की थोक महँगाई भी -18.26% से कम हो कर -21.62% पर आ गये हैं। इसके अलावा अंडा, मांस-मछली का थोक मूल्‍य -0.29% से घट कर -1.01% पर आ गया है।

इससे पहले खुदरा मूल्‍य सूचकांक आधारित महँगाई दर मई में घट कर 6 साल के निचले स्‍तर 2.82% पर आयी है। लगातार चौथे महीने में खुदरा महँगाई आरबीआई के 4% सहनशीलता सीमा से नीचे है। वहीं, साल दर साल आधार पर महँगाई दर फरवरी 2019 के बाद सबसे कम बनी हुई है।

(शेयर मंथन, 17 जून 2025)

(आप किसी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख