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बढ़ती बिजली माँग के बीच अडानी ग्रीन एनर्जी शेयरों में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

राम जानना चाहते हैं कि उन्हें अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि बढ़ती कंजम्पशन, कैपेक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स और लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसी टेक्नोलॉजी के लिए भारी मात्रा में पावर की जरूरत होगी। ऐसे में पावर सेक्टर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को भी गहराई से देखना शुरू किया। हालांकि, रिन्यूएबल सेक्टर में उन्हें कुछ बुनियादी चुनौतियां नजर आती हैं। सबसे बड़ी चिंता ओवर-कैपेसिटी को लेकर है। सोलर और विंड पावर में भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट होता है, लेकिन इन प्लांट्स की यूटिलाइजेशन पूरी नहीं हो पाती। दिन में उत्पादन होता है, रात में प्लांट्स idle रहते हैं। भले ही भविष्य में एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी से कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 25-30% से बढ़कर 40-45% तक हो जाए, फिर भी निवेश बहुत भारी रहता है। इस तरह के प्रोजेक्ट्स को सिर्फ इक्विटी से फंड करना संभव नहीं होता, जिससे डेट और ब्याज का बोझ बढ़ता है। 

पावर कंपनियां बिना पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के कैपेसिटी एक्सपेंशन नहीं करतीं। नए प्लांट को ऑपरेशनल होने में दो से ढाई साल लग जाते हैं, इसलिए पहले से सरकारी या प्राइवेट प्लेयर्स के साथ करार होना जरूरी होता है। इस वजह से डेट ज्यादा होने के बावजूद एक हद तक सुरक्षा रहती है। खासकर सेंट्रल गवर्नमेंट के साथ हुए PPA सुरक्षित माने जाते हैं, जबकि स्टेट गवर्नमेंट के साथ भुगतान में देरी का जोखिम रहता है। 

अडानी ग्रीन एनर्जी की बात करें तो स्टॉक अभी करीब 935 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है। वैल्यूएशन के स्तर पर यह लगभग 70 गुना PE पर है, जो काफी ऊंचा माना जाएगा। डेट-टू-इक्विटी रेशियो भी करीब 4.5 गुना है। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट्स और PPA की वजह से रिस्क उतना बड़ा नहीं दिखता, जितना नंबरों से लगता है। फिर भी मौजूदा माहौल में इसमें 5% से ज्यादा का रिस्क नहीं लेना चाहिए। लगभग 880-890 रुपये का स्तर इसके लिए अहम सपोर्ट माना गया है। अगर यह स्तर टूटता है, तो फिर स्टॉक में बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है।

वेशकों को लंबी अवधि के बाजार चक्र को समझने की सलाह दी। उनका कहना है कि हर पांच साल के चक्र में डेढ़ से दो साल ऐसे आते हैं, जब बाजार में पैसा बनना मुश्किल होता है। यह समय तैयारी का होता है, न कि निराशा का। छोटे-छोटे मुनाफे बनाकर कैश तैयार करना और आने वाले बड़े अवसरों के लिए खुद को तैयार रखना ही समझदारी है। अडानी ग्रीन एनर्जी जैसे स्टॉक्स में बिजनेस ग्रोथ की संभावना जरूर है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन पर निवेशकों को बेहद सतर्क रहना चाहिए।


(शेयर मंथन, 17 जनवरी 2026)

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