अडानी पावर को लेकर आलोक रंजन जी का सवाल है। उनके पास कंपनी के 1,000 शेयर हैं, जिन्हें उन्होंने करीब 50 रुपये के भाव पर खरीदा था और उनका नजरिया लगभग 5 साल का है।
सवाल यह है कि शेयर में काफी तेजी आने के बाद मौजूदा स्तर पर क्या रणनीति अपनाई जाए और क्या इसे आगे भी होल्ड किया जा सकता है? बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि पावर सेक्टर में अगले पांच साल के दौरान ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं और इसी वजह से अडानी पावर को लेकर लंबी अवधि का नजरिया पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। हालांकि, मौजूदा स्तर पर शेयर में काफी तेजी आ चुकी है और वैल्यूएशन भी बढ़ गया है। ऐसे में यहां से नए निवेश के मामले में सावधानी बरतना जरूरी है। उनका कहना है कि इस स्तर पर रिस्क अपेक्षाकृत ज्यादा और संभावित रिवॉर्ड कम दिखाई देता है।
तकनीकी नजरिए से देखें तो अडानी पावर में एक बड़ा साइकिल पूरा हो चुका है। शेयर ने लंबे समय में लगभग ₹6 के स्तर से बढ़कर ₹250 के आसपास तक का सफर तय किया है। यानी कुछ वर्षों में शेयर में जबरदस्त रिटर्न देखने को मिला है। इसलिए इस तेजी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मौजूदा स्तर पर शेयर में ताजा खरीदारी करने के बजाय बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि निवेशक करेक्शन का इंतजार करें और उसके बाद स्थिति का दोबारा मूल्यांकन करें।
विशेषज्ञ के अनुसार, शेयर में करीब 38 फीसदी का करेक्शन हो चुका है, लेकिन यह करेक्शन अभी पर्याप्त नहीं माना जा रहा। लगभग ₹200 का स्तर एक महत्वपूर्ण रिस्क मैनेजमेंट जोन हो सकता है, क्योंकि यहां 200-डे मूविंग एवरेज के आसपास भी शेयर को सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, अगर शेयर में करीब 62 फीसदी का रिट्रेसमेंट देखने को मिलता है तो यह स्तर लगभग ₹175-180 के आसपास बन सकता है। इस क्षेत्र में शेयर का दोबारा मूल्यांकन करना ज्यादा बेहतर हो सकता है।
अडानी पावर का पिछला महत्वपूर्ण ब्रेकआउट लेवल करीब 179 रुपये का था, जो जून 2024 का हाई था। सितंबर 2025 में शेयर ने इस स्तर के ऊपर ब्रेकआउट देने की कोशिश की, लेकिन उसे टिकाए रखने में सफल नहीं रहा। इसके बाद शेयर में करेक्शन आया और फिर एक नई तेजी देखने को मिली। इसलिए 175-180 रुपये के आसपास का क्षेत्र तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अगर शेयर इस क्षेत्र तक आता है तो निवेशक रिस्क और रिवॉर्ड को नए सिरे से देख सकते हैं।
हालांकि, मौजूदा निवेशकों की स्थिति नए निवेशकों से बिल्कुल अलग है। जिन निवेशकों ने ₹50 के आसपास शेयर खरीदा है और अभी भी उनके पास अच्छा खासा मुनाफा मौजूद है, उनके लिए पूरा निवेश एक साथ बेचने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता के हिसाब से रणनीति बनाना जरूरी है। यदि कोई निवेशक मुनाफे को सुरक्षित करना चाहता है तो आंशिक प्रॉफिट बुकिंग एक विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर कुछ हिस्से की बिक्री करके शुरुआती पूंजी निकालना और बाकी निवेश को लंबी अवधि के लिए बनाए रखना एक रणनीति हो सकती है।
विशेषज्ञ ने यह भी स्पष्ट किया कि पांच साल का नजरिया रखने वाले निवेशक को शेयर में आने वाले करेक्शन को ट्रैक करना चाहिए। पावर सेक्टर में भविष्य में मांग बढ़ने की गुंजाइश है और कंपनी की स्थिति को देखते हुए लंबी अवधि में संभावनाएं बनी हुई हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा ऊंचे स्तर पर बिना किसी जोखिम प्रबंधन के निवेश किया जाए। शेयर की कीमत जितनी तेजी से ऊपर गई है, उतना ही जरूरी है कि निवेशक नीचे की तरफ संभावित जोखिम को भी समझे।
200 रुपये का स्तर उन निवेशकों के लिए एक अहम निगरानी स्तर हो सकता है जो अपने मुनाफे को प्रोटेक्ट करना चाहते हैं। वहीं ₹175-180 के आसपास का क्षेत्र ज्यादा बड़ा करेक्शन आने की स्थिति में महत्वपूर्ण बन सकता है। हालांकि, किसी एक स्तर को निश्चित खरीद या बिक्री का संकेत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि बाजार की परिस्थितियां और कंपनी के फंडामेंटल समय के साथ बदल सकते हैं।
(शेयर मंथन, 21 अगस्त 2026)
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