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AI से घटेगी मैनपावर की जरूरत? कंपनी ने एयरलाइन में दिखाया इस्तेमाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कंपनियां इसे अपने रोजमर्रा के बिजनेस ऑपरेशन में इस्तेमाल कर रही हैं।

वन प्वाइंट वन सॉल्यूशन भी जनरेटिव AI का इस्तेमाल कस्टमर सर्विस और सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए कर रही है। कंपनी के मुताबिक AI की मदद से कस्टमर कॉल, ईमेल, चैट और सोशल मीडिया से आने वाली क्वेरीज को अधिक प्रभावी ढंग से संभालने और मानव हस्तक्षेप को कम करने की कोशिश की जा रही है।

कंपनी ने AI के इस्तेमाल का एक उदाहरण भारत की एक बड़ी एयरलाइन के साथ अपने काम के जरिए दिया। प्रबंधन के मुताबिक एयरलाइन में AI आधारित समाधान लागू करने के बाद करीब 30 फीसदी मैनपावर स्टाफ को AI आधारित सिस्टम से रिप्लेस किया गया है। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का कारोबार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हालांकि यह आंकड़ा कंपनी के प्रबंधन द्वारा इंटरव्यू में दिया गया दावा है और ट्रांसक्रिप्ट में एयरलाइन का नाम नहीं बताया गया है।

कंपनी का AI प्लेटफॉर्म केवल एयरलाइन सेक्टर तक सीमित नहीं है। प्रबंधन के अनुसार बैंकिंग में भी AI को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी ने बताया कि वह लैटिन अमेरिका में कई बड़े बैंकों के साथ काम कर रही है, जहां KYC डॉक्यूमेंट्स, बैंकिंग वॉल्यूम और नए बैंकिंग नियमों से जुड़े काम में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी का AI सिस्टम कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के साथ भारतीय भाषाओं में भी काम करने के लिए विकसित किया जा रहा है।

भारत में कंपनी ने इंश्योरेंस, एयरलाइन, ट्रैवल-टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में अपने AI समाधानों को लागू किया है। वहीं लैटिन अमेरिका में बैंकिंग, यूटिलिटी, फूड और क्विक-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी AI को केवल एक प्रोडक्ट के रूप में नहीं बल्कि अलग-अलग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले बिजनेस प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना चाहती है।

AI के इस मॉडल में कंपनी का प्राइसिंग सिस्टम भी महत्वपूर्ण है। प्रबंधन के मुताबिक कंपनी ट्रांजैक्शन आधारित मॉडल पर काम करती है, जिसमें AI सिस्टम से होने वाले प्रत्येक कनेक्शन या ट्रांजैक्शन के आधार पर शुल्क लिया जाता है। कंपनी का कहना है कि इस मॉडल से लागत को कवर करने के साथ उसकी प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन में सुधार की संभावना बनती है।

AI के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले वर्षों में कंपनियों की लागत संरचना और कर्मचारियों की भूमिका में बदलाव संभव है। हालांकि AI से जुड़े वास्तविक वित्तीय लाभ को पूरी तरह हासिल करने में समय लग सकता है। कंपनी के प्रबंधन ने भी संकेत दिया है कि AI से मार्जिन पर बड़ा प्रभाव अगले 12 से 18 महीनों में अधिक स्पष्ट हो सकता है।


(शेयर मंथन, 27 अगस्त 2026)

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