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बीएसई के दमदार नतीजों पर ब्रोकरेज की मिली-जुली राय, फिर भी क्यों सतर्क हैं ब्रोकरेज?

बीएसई (BSE) के जून तिमाही नतीजों के बाद वैश्विक ब्रोकरेज हाउसों ने कंपनी को लेकर मिला-जुला रुख अपनाया है।

जेपी मॉर्गन ने शेयर पर 'न्यूट्रल' रेटिंग के साथ 4,090 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 63% बढ़कर 1,566 करोड़ रुपये रहा, जबकि तिमाही आधार पर यह लगभग स्थिर रहा। इक्विटी डेरिवेटिव कारोबार में मजबूती के चलते ट्रांजैक्शन चार्जेज 80% बढ़कर 1,330 करोड़ रुपये पहुंच गए। EBITDA 67% बढ़कर 1,046 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन बढ़कर 66.8% हो गया। वहीं, निवेश आय में तेज उछाल की बदौलत शुद्ध मुनाफा 62% बढ़कर 874 करोड़ रुपये रहा।

जेफरीज ने बीएसई पर 'होल्ड' रेटिंग बरकरार रखते हुए लक्ष्य मूल्य 3,440 रुपये से बढ़ाकर 3,520 रुपये किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि तिमाही के दौरान EBITDA अनुमान के अनुरूप रहा, लेकिन ऑप्शंस ट्रेडिंग की ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। मई और जून में VIX के कम रहने से औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम (ADTO) की वृद्धि सीमित रही। Jefferies का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में ट्रेडिंग वॉल्यूम और धीमा हो सकता है। साथ ही, साप्ताहिक ऑप्शन एक्सपायरी और प्रबंधन में संभावित बदलाव कंपनी के लिए निगरानी वाले प्रमुख पहलू रहेंगे। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन काफी ऊंचा है और कंपनी का कारोबार अभी भी काफी हद तक एक ही उत्पाद पर निर्भर है।

यूपीएस ने भी बीएसई पर 'न्यूट्रल' रेटिंग के साथ 4,500 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी का राजस्व अनुमान के अनुरूप रहा, जबकि मजबूत निवेश आय से मुनाफे को अतिरिक्त सहारा मिला। ट्रेडिंग और अन्य सहायक कारोबारों में परिचालन प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उसका फोकस केवल बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बाजार में भागीदारी बढ़ाने पर है। डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म पर सक्रिय सदस्यों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की संख्या लगातार बढ़ रही है। कंपनी की योजना 2027 की शुरुआत तक कैश मार्केट में दोहरे अंकों की बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की है। इसके अलावा नए इंडेक्स डेरिवेटिव, कॉरपोरेट बॉन्ड, डेटा प्रोडक्ट्स और StAR NPS प्लेटफॉर्म जैसे नए उत्पादों पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि, बढ़े हुए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), RBI के नए नियमों और वैश्विक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन प्रबंधन का मानना है कि अब तक इनका ऑप्शंस कारोबार पर सीधा असर सीमित रहा है।

(शेयर मंथन, 05 अगस्त 2026)

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