शेयर मंथन में खोजें

अमीरों में मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) फिर अव्वल

रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) देश के 100 सबसे ज्यादा अमीरों की सूची में एक बार फिर अव्वल रहे हैं।
लेकिन भारती एयरटेल के सुनील भारती मित्तल और अडाणी समूह के गौतम अडाणी इस सूची के शीर्ष दस में शामिल नहीं हैं। 
फोर्ब्स की ताजा सूची के मताबिक मुकेश अंबानी 2100 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ पहले स्थान पर हैं। वहीं स्टील किंग आर्सेलर मित्तल 1600 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। विप्रो के अजीम प्रेमजी तीसरी पायदान पर हैं। अजीम प्रेमजी 1220 करोड़ डॉलर की संपत्ति के मालिक है। शापूरजी ग्रुप के पालोनजी मिस्त्री चौथे स्थान पर पहुँच गये हैं। पोलोनजी मिस्त्री 980 करोड़ डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। सन फार्मा के संस्थापक व प्रबंध निदेशक दिलीप संघवी 920 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ पाँचवे स्थान पर हैं। गोदरेज समूह के चेयरमैन अदि गोदरेज 900 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ छठे स्थान पर आ गये हैं। सातवें स्थान पर कब्जा जमाया है जिंदल समूह की सावित्री जिंदल ने। आठवें स्थान पर एस्सार समूह के रुइया बंधु शशि और रवि रुइया हैं। नौवें स्थान पर हिंदुजा भाई और दसवें स्थान पर कुमार मंगलम बिड़ला हैं। 
मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी तेरहवें स्था़न से चढ़कर ग्यारहवें स्थान पर आ गये हैं। इनकी संपत्ति 600 करोड़ डॉलर है। इस दौरान देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल देश में जहाँ सिर्फ 57 अरबपति थे, वहीं इस साल ये संख्या बढ़कर 61 पहुँच गयी है। (शेयर मंथन, 25 अक्टूबर 2012)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख