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आरबीआई (RBI) के फैसले पर उद्योग जगत की राय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज मौद्रिक नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। 

उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला (Sidharth Birla) के मुताबिक उद्योग जगत को उम्मीद थी कि इस बार आरबीआई ब्याज दरों में अवश्य कटौती करेगा। लगातार कमजोर माँग और महँगाई दर में जारी सुधारों की वजह से उद्योग जगत को उम्मीद थी कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती करेगा। हालाँकि कोर क्षेत्र गतिविधियों में कुछ सुधार हुआ है। कमजोर माँग की वजह से उत्पादन में कमी आयी है। इसलिए क्षमता उपयोग में व्यापक सुधार रूके हुए हैं। 

सिद्धार्थ बिड़ला के मुताबिक फिक्की के ताजा उत्पादन सर्वेक्षण में क्षमता विस्तार की कमजोर संभावनाओं का पता चला है। मौद्रिक नीति में ढ़ील और बैंकों द्वारा इसके प्रसार से माँग में सुधार के अलावा पूँजीगत व्यय को प्रोत्साहित किया जाना एक मुख्य तत्व हो सकता है। नयी और विस्तृत क्षमताओं के बिना भविष्य में आपूर्ति पक्ष में जोखिम बन सकता है, जिसका आगामी महँगाई दर पर प्रभाव पड़ेगा। हमारा यह विश्वास बना हुआ है कि आरबीआई अगली मौद्रिक नीतिगत समीक्षा से पहले सकारात्मक संकेत दे सकता है।  

उद्योग संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के अध्यक्ष अजय एस श्रीराम (Ajay S Shriram) ने आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती नहीं किये जाने के फैसले पर कहा कि आरबीआई का ध्यान विकास दर हासिल करने के अपने लक्ष्य के साथ महँगाई दर को नियंत्रित करने में है। महँगाई की समस्या बाजार के अनुमानों के अनुरूप ही रही है।

सीआईआई के मुताबिक इस समय ब्याज दरों में सांकेतिक कटौती भी एक सशक्त संदेश देने में कारगर साबित होती कि सरकार और आरबीआई दोनों माँग को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं। चीन ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आश्चर्यजनक रूप से ब्याज दरों में 0.40% अंकों की कटौती की। इसी तरह विशेष रूप से भारतीय उद्योग जगत को भी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी। ब्याज दरों में कटौती से निवेश माँग को प्रोत्साहित करने, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र में खर्च को प्रेरित करने और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था में सुधार कमजोर बना हुआ है और उद्योग जगत लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ रहा है। ब्याज दरों में कटौती करने के आरबीआई के सशक्त निर्णय से विशेष रूप से कर्ज की कमी से जूझ रहे एसएमई क्षेत्र को फायदा पहुँचेगा और उद्योग जगत के कर्ज में भी सुधार होगा। हाल ही में महँगाई दर में कमी और आरबीआई की आरामदायक स्थिति में उपभोक्ता कीमत सूचकांक (सीपीआई) के जाने से यह संकेत मिलते हैं कि ब्याज दरों में कटौती के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा किया जा चुका है।

सीआईआई को उम्मीद है कि आरबीआई अगली मौद्रिक नीतिगत बैठक में विकास के पक्ष में फैसला लेगा और नववर्ष में ब्याज दरों में कम से कम 0.50% अंकों की कटौती होगी। (शेयर मंथन, 02 दिसंबर 2014) 

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