शेयर मंथन में खोजें

अक्‍टूबर 2015 में औद्योगिक विकास दर (IIP) 9.8% पर

अक्‍टूबर 2015 में औद्योगिक उत्‍पादन बढ़ने की दर अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों के अनुमानों से कहीं ज्यादा रही है। आज जारी आँकड़ों के मुताबिक अक्‍टूबर 2015 में औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (IIP) 181.3 अंक रहा, जो अक्‍टूबर 2014 के मुकाबले 9.8% ज्‍यादा है। इस तरह अक्‍टूबर 2015 में औद्योगिक विकास दर 9.8% रही। वित्‍त वर्ष 2015-16 की अप्रैल-अक्‍टूबर अवधि में औद्योगिक विकास दर 4.8% आँकी गयी है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) की ओर से अक्‍टूबर 2015 के लिए जारी किये गये औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक के त्‍वरित आकलन (आधार वर्ष : 2004-05) से यह जानकारी मिली है। आईआईपी का आकलन 16 स्रोत एजेंसियों से प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।
अक्‍टूबर 2014 के मुकाबले अक्‍टूबर 2015 में खनन क्षेत्र की की उत्‍पादन वृद्धि दर 4.7% रही। विनिर्माण (मैन्‍युफैक्‍चरिंग) क्षेत्र में 10.6% और बिजली क्षेत्र में 9.0% वृद्धि दर्ज की गयी। अप्रैल-अक्‍टूबर 2015-16 में इन तीनों क्षेत्रों की उत्‍पादन वृद्धि दर क्रमश: 2.0%, 5.1% और 5.2% आँकी गयी है।
अक्‍टूबर, 2015 में बुनियादी वस्‍तुओं (बेसिक गुड्स) की उत्‍पादन वृद्धि दर अक्‍टूबर, 2014 की तुलना में 4.1% रही। पूँजीगत सामान में 16.1% तथा मध्‍यवर्ती वस्‍तुओं में 6.7% की वृद्धि दर रही। टिकाऊ उपभोक्‍ता सामानों की उत्‍पादन वृद्धि दर अक्‍टूबर 2015 में 42.2% रही है, जबकि गैर-टिकाऊ उपभोक्‍ता सामानों की उत्‍पादन वृद्धि दर अक्‍टूबर 2015 में 4.7% रही। कुल मिला कर उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की उत्‍पादन वृद्धि दर अक्‍टूबर 2015 के दौरान 18.4% आँकी गयी है। (शेयर मंथन, 11 दिसंबर 2015)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख