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सोमवार 1 अगस्त : बड़ी कारोबारी सुर्खियाँ (Top Business News)

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स (Sensex) 48.74 अंक (0.17%) की गिरावट के साथ 28,003.12 पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी 50 (Nifty 50) 1.95 अंक (0.02%) की कमजोरी के साथ 8,636.55 पर रहा।

जुलाई में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) के ट्रैक्टरों की घरेलू बाजार की बिक्री में 15% और कुल बिक्री में 14% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि निर्यात में 7% की कमी दर्ज की गयी है।
जुलाई महीने में आयशर मोटर्स (Eicher Motors) की कुल मोटरसाइकिल बिक्री में सालाना आधार पर 31% की बढ़ोतरी हुई है।
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) विधेयक तीन अगस्त को चर्चा के लिए राज्य सभा में पेश किया जायेगा।
कार निर्माता मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) की जुलाई महीने की बिक्री में सालाना आधार पर 12.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। कंपनी ने अपने कुछ चुनिंदा मॉडलों की कीमत में वृद्धि करने की घोषणा भी की है।
अप्रैल-जुलाई तिमाही में आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) का कंसोलिडेटेड मुनाफा तिमाही-दर-तिमाही 9.54% गिर कर 796.54 करोड़ रुपये रहा है।
केंद्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने आज राज्य सभा में कहा कि देश में बिजली की कमी नहीं है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑन टैप यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं।
बॉयोकॉन (Biocon) की सीएमडी किरन मजूमदार शॉ ने कहा है कि देश में लाइसेंस राज की जगह अप्रूवल राज ने ले ली है।
निजी क्षेत्र के दिग्गज आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट मिल कर भारत में एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत करेंगे।
सब्सिडी वाले एलपीजी (LPG) सिलिंडर की कीमत 1.93 रुपये बढ़ गयी है। (शेयर मंथन, 01 अगस्त 2016)

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

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