शेयर मंथन में खोजें

मुनाफा घटने से टूटा सीएट (Ceat) का शेयर

कमजोर वित्तीय नतीजों के काराण आज टायर निर्माता कंपनी सीएट (Ceat) के शेयर में 2.5% से ज्यादा की कमजोरी आयी है।

साल दर साल आधार पर 2018 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सीएट के मुनाफे में 36.1% की गिरावट आयी है। 2017 की इसी तिमाही में 82.64 करोड़ रुपये के मुकाबले कंपनी ने 52.77 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
हालाँकि मुनाफे में गिरावट के बीच सीएट आमदनी में इजाफा हुआ है। कंपनी की शुद्ध आमदनी 1,574.15 करोड़ रुपये से 8.9% की बढ़त के साथ 1,713.93 करोड़ रुपये रही। सीएट के अनुसार दोपहिया और कारोबारी वाहन क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से कंपनी की आमदनी को काफी सहारा मिला। मगर सीएट के नतीजों बाजार जानकारों के अनुमानों से चूक गये।
हालाँकि कच्चे माल की उच्च लागत और अधिक ऑपरेटिंग व्यय के कारण सीएट के परिचालन प्रदर्शन पर दबाव पड़ा, जिससे कंपनी का एबिटा 23.8% घट कर 142.56 करोड़ रुपये और एबिटा मार्जिन 356 आधार अंक गिर कर 8.3% रह गया।
वितरण नेटवर्क पर नजर डालें तो सीएट के डीलरों की संख्या 4,500 से अधिक, 500 से ज्यादा सीईएटी फ्रेंचाइजी (दुकानें + हब) और 280 से ज्यादा दोपहिया वितरक हैं। साथ ही कंपनी ने पिछले 2 वर्षों में मल्टी ब्रांड आउटलेट / शॉप इन शॉप मॉडल विकसित किये गये हैं, जिनकी संख्या 400 से ज्यादा है।
कमजोर नतीजों से सीएट के शेयर भाव में कमजोरी आयी है। बीएसई में सीएट का शेयर 1,151.95 रुपये के पिछले बंद स्तर की तुलना में गिरावट के साथ 1,122.00 रुपये पर खुल कर अभी तक के कारोबार में 1,084.30 रुपये तक गिरा है, जो इसके पिछले एक महीने का निचला स्तर है। 12.40 बजे के करीब यह 32.35 रुपये या 2.81% की गिरावट के साथ 1,119.60 रुपये पर चल रहा है। (शेयर मंथन, 29 जनवरी 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख