शेयर मंथन में खोजें

एसबीआई (SBI) ने गृह ऋण पर घटायी ब्याज दर

आरबीआई (RBI) द्वारा रेपो रेट कम किये जाने के एक दिन बाद ही एसबीआई (SBI) ने गृह ऋण पर ब्याज दर घटा दी है।

देश के सबसे बड़े बैंक ने शुक्रवार को 30 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर ब्याज दर में 5 आधार अंकों की कटौती करने का ऐलान किया। बैंक की नयी गृह ऋण दर 08 फरवरी से ही लागू है।
गौरतलब है कि गृह ऋण दर में कटौती लागू करने के लिए बैंक को या तो एक वर्षीय एमसीएलआर घटानी होगी। या फिर बैंक सभी अवधियों की एमसीएलआर घटा सकता है।
बता दें कि आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती करने के बाद एसबीआई से पहले बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) ने अपनी 6 महीनों की एमसीएलआर में 5 आधार अंकों की कटौती का ऐलान किया था।
गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्वि-मासिक समीक्षा में रेपो रेट 25 आधार अंक कर 6.25% कर दी थी। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) की अध्यक्षता में हुई यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी। एमपीसी ने अपने नीतिगत नजरिये को भी "सख्त" से "उदासीन" बना लिया है।
उधर बीएसई में शुक्रवार को एसबीआई का शेयर 2.55 रुपये या 0.89% की कमजोरी के साथ 285.05 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर बैंक की बाजार पूँजी 2,54,395.37 करोड़ रुपये है। वहीं पिछले 52 हफ्तों में बैंक के शेयर का सर्वाधिक भाव 325.85 रुपये और निचला स्तर 232.00 रुपये रहा है। (शेयर मंथन, 09 फरवरी 2019)

Add comment

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • नये ट्रंप टैरिफ का भारत पर कैसा असर - निवेश मंथन (जनवरी 2026)

    अभी-अभी फरवरी के आरंभ में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी ही थी, और लगा था कि साल भर की अनिश्चितता पर विराम लगने वाला है। पर अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने इसकी काट निकालते हुए एक नया टैरिफ घोषित कर दिया है।  

  • बाजार सर्वेक्षण : घरेलू मजबूती पर भरोसा - निवेश मंथन (दिसंबर 2025)

    हमारे शेयर बाजार में वर्ष 2025 को एक दुःस्वप्न की तरह समझा जा रहा है। हालाँकि एक राय यह भी है कि 2025 को बाजार के लिए खराब मानना धारणा अधिक है, तथ्य कम। फिर भी, बाजार में अधिकांश लोग चाह रहे हैं या मान रहे हैं कि 2026 में बाजार का हाल 2025 से अच्छा ही रहना चाहिए। 

देश मंथन के आलेख