एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज को लेकर निवेशकों का नजरिया फिलहाल सकारात्मक दिखाई दे रहा है।
बातचीत में बताया गया कि कंपनी के हालिया नतीजे अच्छे रहे हैं और एचडीएफसी ग्रुप से अलग होकर एक फोकस्ड मैनेजमेंट का ध्यान अब इस बिजनेस पर ज्यादा केंद्रित रह सकता है। एचडीबी फाइनेंशियल को एचडीएफसी ग्रुप के भीतर अपेक्षाकृत आकर्षक वैल्यूएशन वाले विकल्पों में से एक माना गया है। हालांकि, इसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाला रॉकेट स्टॉक मानने के बजाय एक क्वालिटी पोर्टफोलियो स्टॉक की तरह देखने की सलाह दी गई है।
वैल्यूएशन की बात करें तो करीब 2 गुना Price-to-Book पर शेयर को अपेक्षाकृत उचित माना गया है, जबकि ब्रांड प्रीमियम को देखते हुए करीब 2.5 गुना Price-to-Book भी बहुत महंगा नहीं माना गया। कंपनी अगर इंडस्ट्री की ग्रोथ के अनुरूप 10–15 प्रतिशत की दर से लगातार प्रदर्शन करती रहती है, तो इसे एक कंसिस्टेंट कंपाउंडर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, निवेशकों को इससे बहुत तेज या रॉकेट जैसी रिटर्न की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
शेयर की हालिया चाल की बात करें तो जून में करीब ₹63 के लो से इसमें रिकवरी देखने को मिली और मौजूदा स्तर करीब ₹665 के आसपास बताया गया। आगे 625 से 620 रुपये का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। अगर शेयर इस स्तर के आसपास सपोर्ट लेकर दोबारा ऊपर की ओर बढ़ता है, तो यह सकारात्मक संकेत हो सकता है। वहीं मौजूदा वैल्यूएशन में बहुत ज्यादा जोखिम नहीं होने की बात भी विश्लेषण में कही गई है।
एचडीबी फाइनेंशियल को ट्रेडिंग स्टॉक के बजाय पोर्टफोलियो स्टॉक के रूप में देखने पर जोर दिया गया। ऐसे शेयरों में छोटी अवधि की गिरावट को केवल कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि लंबी अवधि के निवेशक के लिए धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर माना जा सकता है। बातचीत में ICICI Lombard जैसे उदाहरण का उल्लेख करते हुए समझाया गया कि क्वालिटी कंपनियों में कई बार लंबी अवधि की कहानी मजबूत होने के बावजूद शेयर लंबे समय तक उतार-चढ़ाव से गुजरता है।
800 रुपये के आसपास खरीदारी करने वाले निवेशक के लिए भी तुरंत घबराकर निकलने की बजाय पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया। अगर निवेशक के कुल पोर्टफोलियो में एचडीबी फाइनेंशियल की हिस्सेदारी केवल 1 से 2% है, तो गिरावट का इस्तेमाल धीरे-धीरे एवरेजिंग के लिए किया जा सकता है। लेकिन अगर पहले से ही इसकी हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो चुकी है, तो लगातार एवरेजिंग करने के बजाय पोर्टफोलियो वेट को नियंत्रित रखना बेहतर माना गया है।
(शेयर मंथन, 12 अगस्त 2026)
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