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क्या निफ्टी को छोड़कर मिड-स्मॉलकैप पर फोकस करने का समय आ गया है?

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से निफ्टी की चाल और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों के प्रदर्शन में अंतर देखने को मिल रहा है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ इंडेक्स को देखकर बाजार से कमाई की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि निफ्टी के लिए 23,100 के आसपास का स्तर अहम है। जब तक इसके नीचे क्लोजिंग नहीं मिलती, तब तक मौजूदा रिकवरी को जारी माना जा सकता है। हालांकि, 23,800-24,000 के आसपास पहुंचने के बाद बाजार की दिशा का दोबारा आकलन करना होगा।

निफ्टी और निफ्टी आईटी में दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है, लेकिन बाजार में कमाई की रिकवरी शुरू हो चुकी है। उनका फोकस अर्निंग्स रिकवरी पर है। उन्होंने कहा कि मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में आई रिकवरी को केवल SIP फ्लो से नहीं समझा जा सकता, क्योंकि गिरावट के दौरान भी SIP का प्रवाह जारी था। उनके अनुसार आर्थिक ग्रोथ, कंजम्पशन ग्रोथ और क्रेडिट ग्रोथ का असर घरेलू कंपनियों की कमाई पर दिखाई दे सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा बाजार को पूरी तरह से स्टॉक-पिकिंग वाला बाजार माना जा सकता है, जहां शेयरों के चयन का महत्व बढ़ जाता है। उनके मुताबिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो के लिए करीब 20-25 या 30 शेयरों की पहचान करनी चाहिए और जरूरत के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव भी करते रहना चाहिए। उन्होंने निफ्टी के लिए 24,000 के ऊपर सकारात्मक नजरिया बनने की बात कही, जबकि मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप में उनकी सकारात्मकता अर्निंग्स रिकवरी से जुड़ी हुई है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि ये बाजार विश्लेषक के विचार हैं। निवेशकों के लिए अलग-अलग कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन और जोखिम को अलग से देखना जरूरी होगा। ट्रांसक्रिप्ट में भी यह बात सामने आती है कि अचानक किसी बड़े जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम का असर बाजार पर तेजी से पड़ सकता है।


(शेयर मंथन, 24 सितंबर 2026)

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