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क्या भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बिजनेस कॉन्फिडेंस मजबूत बना हुआ है?

बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स को लेकर बातचीत में बताया गया कि यह इंडेक्स कारोबार और उद्योग जगत के लोगों के सेंटिमेंट्स को कैप्चर करने का प्रयास है।

इसे फिलहाल शुरुआती ट्रायल के तौर पर लॉन्च किया गया है और आगे इकोनॉमिस्ट, मेंबर्स तथा मीडिया एक्सपर्ट्स के सुझावों के आधार पर इसे और बेहतर बनाने की योजना है। वक्ता के मुताबिक, मौजूदा जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों के कारण लोगों की सोच में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी खर्च बढ़ाने की सोच होती है तो कभी बचत पर जोर रहता है।

बातचीत में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक रुख भी व्यक्त किया गया। पहले क्वार्टर में 7.8% की ग्रोथ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि पूरे वित्त वर्ष के प्रदर्शन को केवल एक तिमाही के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय क्वार्टर-दर-क्वार्टर और महीने-दर-महीने के रुझान के साथ लंबे समय की आर्थिक दिशा पर ध्यान देना जरूरी है। चर्चा में 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के विजन की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही गई।

भारत में बड़ी आबादी और बढ़ती खपत को आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बताया गया। वक्ता के अनुसार, प्रति व्यक्ति GDP में वृद्धि, GST कलेक्शन में बढ़ोतरी, घरेलू और विदेशी निवेश तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे संकेतकों पर नजर रखना जरूरी है। सेमीकंडक्टर और ऑटोमोबाइल उत्पादन में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया। बिजनेस इंडेक्स के लिए Make in India, Ease of Doing Business, MSME Growth, Digitisation और Sustainability को पांच प्रमुख पिलर के रूप में बताया गया।

इंडेक्स के जरिए केवल कारोबारियों की मांगों को सामने रखने के बजाय दूसरे देशों की बेंचमार्किंग प्रैक्टिस और सुझावों को भी शामिल करने की बात कही गई। इसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, कारोबार करना आसान करना और निवेश को बढ़ावा देना बताया गया। बातचीत में FDI के साथ घरेलू निजी निवेश को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।


(शेयर मंथन, 01 अक्टूबर 2026)

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